करनाल। ज्यादातर बच्चों के रोल मॉडल उनके पिता होते हैं। पिता की तरह वे समाज में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। जब पिता सेना में हों तो वर्दी और उनकी बहादुरी देखकर उनका उत्साह और बढ़ जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है कि करनाल की एएसपी पुष्पा खत्री की है। जिनके पिता रमेश खत्री भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं।
पिता की बहादुरी की बातें घर पर अक्सर उन्हें सुनने को मिलती थीं। बस यही बातें उनका सपना बन गया। वह सेना में तो नहीं गई लेकिन पुलिस की वर्दी में वह आज लोगों को न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। एएसपी पुष्षा खत्री (एचपीएस) मूल रूप से झज्जर के बहादुरगढ़ की रहने वाली हैं। 2011 में उन्होंने हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। संवाद
रोहतक, जींद में रह चुकीं डीएसपी
एएसपी पुष्षा खत्री ने दो साल यमुनानगर में ट्रेनिंग की। इसके बाद वह रोहतक में डीएसपी पद पर साढ़े पांच साल तक रहीं। इसके बाद वह तीन साल तक जींद में डीएसपी हेड क्वार्टर भी रही हैं। अब वह प्रमोशन पर एएसपी करनाल के पद पर कुछ महीनों से कार्यरत हैं। इस दौरान वह विजिलेंस में भी रह चुकी हैं।
क्राइम ब्रांच मधुबन में एएसपी हैं पति
एएसपी पुष्पा खत्री के पति अमित दहिया अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर क्राइम ब्रांच मधुबन में तैनात हैं। उनका कहना है कि लोगों को न्याय दिलाना ही उनका प्रथम कर्तव्य है।
महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति रहें जागरूक
एएसपी पुष्पा खत्री ने कहा कि महिलाओं को खुद पर विश्वास होना चाहिए। वे जिस क्षेत्र में जाना चाहती हैं उसके लिए प्रयास करना बेहद जरूरी है। माता-पिता को भी अपने बच्चों का सहयोग करना चाहिए और उनका हौसला बढ़ाना चाहिए। जिस भी क्षेत्र में उनका बच्चा जाना चाहता है उसके लिए अपने बच्चों को सहयोग करना चाहिए। वहीं महिलाओं को जागरूक होने की जरूरत है कि उनके अधिकार क्या-क्या हैं, कानूनी अधिकारों का भी उन्हें पता होना चाहिए।