अनाज मंडियों और चावल मिलों में हुए करीब 20 करोड़ रुपये के धान घोटाले में एसआईटी की जांच में अधिकारियों ने आढ़तियों और मिल मालिकों के साथ मिलकर धान का गबन किया था। पुलिस आढ़तियों और मिल मालिकों को गिरफ्तार कर सकती है। दबिश दी जा रही है।
एसआईटी ने एक दिन के रिमांड के बाद वेयर हाउस के सहायक तकनीशियन प्रदीप कुमार को अदालत में पेश किया। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। हैफेड के असंध प्रबंधक प्रमोद, निसिंग प्रबंधक दर्शन सिंह और खाद्य आपूर्ति विभाग के तरावड़ी के निरीक्षक देवेंद्र और इंद्री निरीक्षक रणधीर से पूछताछ की जा रही है।
जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है, आढ़तियों और मिल मालिकों में बैचेनी बढ़ती जा रही है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि अधिकारी आढ़तियों से मिलकर मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण करवाते थे। इसके बाद गेटपास कटवाकर धान की मंडी में फर्जी खरीद दिखाई जाती थी। वहीं, जब सरकार की ओर से मिलों में भौतिक सत्यापन करवाया तो बड़ा गोलमाल सामने आया। इसके बाद पुलिस की जांच आगे बढ़ती गई।
एसपी नरेंद्र बिजारणियां ने मामले में 9 जनवरी 2026 को दूसरी एसआईटी का गठन किया था। एएसपी कांची सिंघल को एसआईटी प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई। पुलिस ने शुक्रवार की रात को पांचों अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। एएसपी कांची सिंघल ने बताया कि पुलिस मामले में पूछताछ कर रही है।
2.57 करोड़ के धान घोटाला में गिरफ्तारी नहीं
घरौंडा अनाज मंडी में 2022-2023 में 2.57 करोड़ रुपये का धान गबन हुआ था। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच में सामने आया था कि 11628 क्विंटल धान की फर्जी खरीद दिखाई गई थी। इसके बाद यह धान फर्जी तौर पर ही मिलों में जाना दिखाया गया। ब्यूरो ने मामले में शामिल घरौंडा मार्केट कमेटी के तत्कालीन सचिव नरेश मान, खाद्य एंव आपूर्ति विभाग के निरीक्षक संदीप कुमार, वाहन उपलब्ध करवाने वाले ट्रांसपोर्टर सुखदेव एवं कंपनी और चार मिल रिद्धि सिद्धी ओवरसीज, गिरीराज ओवरसीज, नंद लाल ओवरसीज, लक्ष्मी राइस मिल घरौंडा के मालिक के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की प्राथमिकी दर्ज की थी। प्राथमिकी दर्ज होने के करीब एक माह बीत जाने के बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है।