फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केयू में उत्तर पुस्तिकाओं की ‘सीक्रेसी’ ताक पर

Mon, 19 May 2014 12:24 AM IST
करनाल
विज्ञापन
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अब उत्तर पुस्तिकाओं की सीक्रेसी दांव पर है। परीक्षा के बाद बेहद गोपनीय तरीके से रखी जाने वाली उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता अब नहीं रहेगी। परीक्षा नियंत्रक के एक फरमान ने उत्तर पुस्तिकाओं को सहेजने में अहम भूमिका निभाने वाले सीक्रेसी ब्रांच के रोल को खत्म कर दिया है।
विज्ञापन


अब उत्तर पुस्तिकाएं सीक्रेसी ब्रांच में नहीं, बल्कि संबंधित यूटीडी में जाएंगी। जो प्राध्यापक परीक्षा लेेेंगे, वही अब उत्तर पुस्तिकाओं के कोडिंग-डिकोडिंग का काम भी करेंगे। आशंका है कि संबंधित विभागों के प्राध्यापक खुद का रिजल्ट बेहतर करने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ भी कर सकते हैं। अब विभाग के प्राध्यापकों को पता होगा कि उनके विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं कहां चेक हो रही हैं। लिहाजा परीक्षा की पूरी सीक्रेसी अब ताक पर है।

यह थी प्रक्रिया
परीक्षा के तुरंत बाद सभी उत्तर पुस्तिकाएं एकत्र करके सीधे सीक्रेसी ब्रांच में भेजी जाती थी। यहां इनमें बचे खाली पेजों पर लाइन लगाकर रोल नंबर वाले पेज को फोल्ड कर दिया जाता था, ताकि चेकिंग करने वाले प्राध्यापकों को रोल नंबर और परीक्षा केंद्र का पता न चले। इसे कोडिंग कहा जाता है। कोडिंग के बाद ही उत्तर पुस्तिकाएं मार्किंग सेंटरों पर चेक होने के लिए भेजी जाती है। 
विज्ञापन


अब क्या होगा
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके मुताबिक अब उत्तर पुस्तिकाएं सीक्रेसी ब्रांच के बजाय सीधे संबंधित विषय के विभाग में भेजी जाएंगी। हिंदी की उत्तर पुस्तिकाएं हिंदी विभाग में। अंग्रेजी की अंग्रेेजी विभाग में। विभाग का स्टाफ ही उत्तर पुस्तिकाओं की कोडिंग करेगा और उन्हें वहीं से चेकिंग के लिए मार्किंग सेंटर पर भेजा जाएगा। विभाग में ही अवार्ड लिस्ट तैयार होगी, जो पूरी करके परीक्षा शाखा को भेजी जाएगी। उत्तर पुस्तिका में बचे खाली पेजों पर अब या तो विभाग के कर्मचारी लाइन लगाएंगे या फिर विद्यार्थी।

पक्षपात की आशंका
जानकारों का कहना है कि यह प्रक्रिया भेदभावपूर्ण और गड़बड़ी वाली हो सकती है। संबंधित विभाग के प्राध्यापक अपना रिजल्ट बेहतर करने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ तो कर सकते हैं, साथ ही मार्किंग सेंटर पर चेकिंग करने वाले प्राध्यापकों से सांठगांठ करके भी रिजल्ट प्रभावित कर सकते हैं। यह भी संभावना है कि उत्तर पुस्तिकाओं में खाली पड़े पेजों पर परीक्षा के बाद भी लिखवाया जा सकता है।
विज्ञापन



विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें