राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के पशुधन अनुसंधान केंद्र में चार कटड़ी समेत 38 मुर्राह भैंसों की मौत की पुष्टि हुई है। संस्थान के मुताबिक मंगलवार को एक जबकि सूत्रों के अनुसार छह भैंसों की मौत हुई। तीन दिन से भैंसों की लगातार हो रही मौत के कारणों की जांच में जुटी तीन टीमें अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पायी हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर भैंसों की मौत का प्रारंभिक कारण बैक्टीरियल इंफेक्शन बताया जा रहा है। पशुओं की लगातार हो रही मौतों से एनडीआरआई में हड़कंप की स्थिति है। मामले में चर्चा है कि देश के नामी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा तीन दिन बाद भी भैंसों के मौत के कारणों का पता नहीं लगा पाना संदेह पैदा करता है। वर्तमान में एनडीआरआई में पशुओं के शव, फीड और अन्य चीजों को छिपाया जा रहा है।
पशुओं की मौत का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। भैंसों की मौत की जांच के लिए एनडीआरआई के वैज्ञानिकों के अलावा लाला लाजपत राय वेटरनरी यूनिवर्सिटी हिसार और इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली के वैज्ञानिक भी जुटे हुए हैं। इन मौतों के लिए बैक्टीरियल इंफेक्शन पर संभावना जताई जा रही है लेकिन यह अभी फाइनल नहीं है। इसके कारणों को पुख्ता करने के लिए विसरा दिल्ली लैब भेजा गया है।
एनडीआरआई में भैंसों की मौत का सिलसिला रुका नहीं है। कई भैंसें बीमार हैं जो अब फीड नहीं ले रही हैं। बीमार भैंसों के लिए अलग से अस्थाई शेड बनाया गया है। फीड के कट्टों को अलग-अलग गोदामों और कोनों में में छिपाया जा रहा है। इसके अलावा मृत पशुओं को 250 एकड़ के कृषि योग्य भूमि में अलग-अलग स्थानों पर दबाया जा रहा है।