करनाल। अपनी मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है। बुधवार को उन्होंने आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन के बैनर तले पहले करीब ढाई घंटे तक लघु सचिवालय के समक्ष धरना दिया। इसके बाद लघु सचिवालय से शहीद मदन लाल ढींगड़ा चौक तक जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने सरकार को जमकर कोसा। अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। यूनियन का दावा है कि बुधवार को करनाल के सभी आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहे। कहा कि जब तक सरकार मांगों का समाधान नहीं करती तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
धरने की अध्यक्षता जिला प्रधान रूपा राणा ने की और संचालन जिला सचिव बिजनेश राणा ने किया। उन्होंने कहा कि सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की मांगों को लागू करने की बजाय प्ले वे स्कूल व डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के नाम पर आंगनबाड़ी केंद्रों को एनजीओ के हवाले करना चाहती है। मुख्यमंत्री ने 2018 में लंबी हड़ताल के बाद मांगों को मान लिया था और लागू करने का आश्वासन दिया था। लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी एक मांग तक पूरी नहीं हुई। मांगे अब भी पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर सीटू जिला प्रधान सतपाल सैनी, सचिव जगपाल राणा, उपप्रधान ओपी माटा, खेत मजदूर यूनियन के राज्य प्रधान कामरेड जगमाल सिह, मधु शर्मा, रीना, सर्वेश राणा, राकेश राणा, मंजू, ममता, बबीता, रेखा, नरेश, शीला, संतोष, सरोज, रोशन गूप्ता और मूर्ती मौजूद रहीं। ब्यूरो
ये हैं मुख्य मांगे-
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
- न्यूनतम वेतन 24 हजार व 16 हजार रुपये दिया जाए।
- 2018 में की गई घोषणाओं को सरकार जल्द लागू करें।
- बिना संसाधन दिए वर्कर व हेल्पर से ऑनलाइन कार्य न करवाया जाए।
- सेवानिवृत्ति के अवसर पर कार्यकर्ता को पांच लाख और सहायिका को तीन लाख रुपये सम्मान के रूप में दिए जाएं।