करनाल। खेलों में रुचि रखने वाले खिलाड़ियों के लिए संबंधित उपकरण खरीदना भी जरूरी होता है। ताइक्वांडो के अभ्यास के लिए जरूरी उपकरण सात साै रुपये में मिल जाते हैं। इसमें डोबोक भी शामिल होती है। डोबोक पारंपरिक वर्दी है, जो मुख्य रूप से एक सफेद जैकेट, पैंट और बेल्ट से बनी होती है। इसके अलावा छाती रक्षक, सिर, कलाई और पिंडली के गार्ड शामिल होते हैं।
ताइक्वांडो कोच सुनील ने बताया कि ताइक्वांडो खेल में लड़कियों की रुचि काफी बढ़ी है। खेल के साथ आत्मरक्षा के दोहरे फायदे से महिलाओं को ताइक्वांडो आकर्षित कर रहा है। कर्ण स्टेडियम की नर्सरी में बड़ी संख्या में महिला खिलाड़ी अभ्यास करने आती हैं। उन्होंने बताया कि इस खेल के लिए उपकरण लेना जरूरी होता है। सात साै रुपये में ये आ जाते हैं। यदि कोई पूरी किट लेता है तो खर्च तीन हजार रुपये तक आता है। उन्होंने बताया कि ताइक्वांडो का सारा सामान दिल्ली व मेरठ से आता है।
उन्होंने बताया कि इसकी डोबोक सात सौ रुपये से शुरू होकर 20 हजार तक जाती है। छाती रक्षक सात साै रुपये से शुरू होकर तीन हजार रुपये में आ जाती है। ऐसे ही हेड गार्ड दो एक हजार रुपये से शुरू होकर तीन हजार रुपये तक जाती है और कलाई और पिंडली रक्षक भी चार साै रुपये से शुरू होकर चार हजार रुपये तक आ जाते है। प्रदर्शन का स्तर बढ़ने के साथ अधिक बेहतर और कीमती उपकरण की आवश्यकता होती है।