करनाल। जिला नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में इलाज कराने वालों की संख्या हर साल बढ़ रही है। बीते पांच साल में 3375 लोगों ने नशा छोड़ने के लिए यहां इलाज कराया लेकिन इनमें से 50 प्रतिशत से अधिक लोग कुछ महीने तो कुछ साल भर बाद फिर से नशा करने लगे हैं।
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। नशा छोड़ने के लिए दवा और काउंसलिंग मुफ्त दी जाती है। इसके बावजूद दोबारा लत लगना और गांवों में बढ़ता नशे का नेटवर्क विभाग के चुनौती है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2022 से अब तक जिले के 10 गांवों को हाई-रिस्क जोन घोषित किया गया है। यहां सबसे ज्यादा लोग नशे में फंसे मिले हैं।
इनमें टपराना, खेड़ी सर्फली, राहड़ा, बांसा, खांडा खेड़ी, सौंकड़ा, चंद्राव, डाचर, गोंदर और असंध शामिल हैं। इन गांवों में विशेष शिविर लगाकर लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
ये नशे छुड़वाए गए : डोडा, अफीम, भुक्की, सुल्फा, गांजा, चरस, टेबलेट एडनॉक, एलप्रैक्स, इंजेक्शन ड्रग्स, तंबाकू उत्पाद (बीड़ी, हुक्का, खैनी, कुल्लिप), शराब आदि की लत छुड़वाने के लिए यहां इलाज किया जाता है। नशा मुक्ति केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग नशा छोड़ चुके होते हैं उनमें से करीब आधे से ज्यादा लोग दोबारा किसी न किसी कारण से नशे की गिरफ्त में लौट आते हैं। इसमें परिवार या दोस्तों का दबाव, नशा करने वाले पुराने साथियों का प्रभाव, मानसिक तनाव या डिप्रेशन, रोजगार की समस्या या आर्थिक तनाव, लंबे समय तक काउंसलिंग या दवा न लेना और नकारात्मक सामाजिक माहौल का होना है। ऐसे लोगों को दोबारा काउंसलिंग दी जाती है और लगातार फॉलोअप किया जाता है। संवाद