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महिला की गिरफ्तारी के बाद अब सामने आया समझौते का शपथपत्र

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प्रताप पब्लिक स्कूल के मालिक और करनाल के तहसीलदार से जुड़े हाई प्रोफाइल सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में एक बार फिर चौंकाने वाले तथ्यों में पीड़िता की ओर से समझौते का शपथपत्र सामने आया है। हालांकि इस शपथपत्र में यह पुष्टि नहीं हो सकी है कि हस्ताक्षर उसी महिला के हैं या फिर किसी अन्य ने किए हैं। इस बारे में पीड़िता के वकील विनय बंसल का कहना है कि शपथ पत्र देखे बिना किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं कर सकते। उनका फिर से यह सवाल है कि महिला का आरोपी पक्ष से समझौता हो चुका था तो फिर वह उन्हें ब्लैकमेल कैसे कर सकती है? इतना जरूर है कि सोमवार को जमानत के लिए अदालत में अपील की जाएगी।
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सामने आए दस्तावेज के अनुसार दुष्कर्म की शिकायत करने वाली महिला आरोपी पक्ष के साथ दो बार पंचायती समझौता कर चुकी है। शपथ पत्र के अनुसार वह ये भी लिख चुकी है कि अगर ये केस खत्म होता है तो उसे कोई ऐतराज नहीं है। हालांकि, अदालत में दो दो बार हुए 164 के बयानों में पीड़िता ने दुष्कर्म के आरोप लगाए हैं। यदि सामने आया शपथ पत्र सही है तो अदालत में अलग से बयान देना भी कई तरह के सवाल खड़े करता है। सवाल ये है कि आखिरकार इस मामले का सच क्या है? अगर दोनों पक्षों में समझौता हो गया था तो फिर विवाद कहां पर हुआ? विदित हो कि दो दिन दिन पहले महिला और उसके पति को ब्लैकमेलिंग के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।
यूं समझिये पूरे मामले को : शपथ पत्र देकर कह चुकी मुझे केस कैंसिल होने पर नहीं ऐतराज
इस मामले से संबंधित दो कागजात मिले हैं। इनमें से एक महिला का शपथ पत्र है और दूसरा पंचायती समझौता । (अमर उजाला यह पुष्टि नहीं करता है कि ये शपथ पत्र सही हैं या झूठे, ये जांच का विषय है।) 6 जुलाई को महिला ने सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। इसके बाद ही महिला ने अपने 164 के बयानों में अदालत के सामने रेप होने की पुष्टि की थी। कागजातों के अनुसार 18 जुलाई को दोनों पक्षों की पंचायत हुई। जिसमें महिला के परिजन और आरोपी पक्ष मौजूद था। दोनों पक्षों के बीच एक दूसरे के खिलाफ दर्ज कराए केस को वापस लेने पर सहमति बनी थी। इस पर महिला, उसके परिजन और आरोपी अजय भाटिया और पूनम नेवट के हस्ताक्षर हैं। इसके बाद फिर से पुलिस ने 24 जुलाई को महिला के अदालत में दोबारा से 164 के बयान कराये, यहां पर महिला ने फिर से दुष्कर्म के आरोपों को सही ठहराया। ऐसे में पहले का समझौता टूट गया। कागजातों की मानें तो 25 जुलाई को फिर से पंचायत हुई। इस पर महिला ने कुरुक्षेत्र (थानेसर) के कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने शपथ पत्र दिया। जिसमें महिला ने बताया कि 24 जुलाई को अदालत में दिये गये बयानों के समय उसकी तबियत ठीक नहीं थी। उस दिन मजिस्ट्रेट ने जो कहा उसे ठीक प्रकार से समझ नहीं सकी। इसलिए 6 जुलाई को एफआईआर नंबर 39, जिमसें अजय भाटिया, पूनम नेवट और तहसीलदार करनाल राज बख्श के खिलाफ दर्ज कराई थी, वह गलतफहमी के कारण थी। इसलिये इस मुकदमे के कैंसिल होने पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, पंचायती समझौतों में पैसों के लेन देन का जिक्र नहीं है। जबकि अजय भाटिया ने शिकायत में जरूर बताया कि महिला 6 लाख पहले ले चुकी है और सवा लाख रुपये और मांग रही है। सूत्रों का दावा कि एफिडेविट देने के बाद भी महिला ने दोबारा से अदालत में आरोपियों के खिलाफ बयान दिये।
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विधायक के बेटे ने आरोप नकारे, कहा-हर जांच के लिए तैयार
अब नीलोखेड़ी के विधायक धर्मपाल गोंदर के बेटे शिव कुमार ने महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को नकारा है। उनका कहना है कि महिला नीलोखेड़ी की रहने वाली है और उनका घर भी नीलोखेड़ी है। महिला के पिता हमारे घर आये थे और मदद के लिए कहा था। सामाजिक रूप से हम महिला के साथ थे। महिला द्वारा लगाये गए आरोप सत्य से परे हैं। मैं खुद हैरान हूं कि महिला ने ऐसे आरोप क्यों और किसके कहने पर लगाए हैं। हमारा इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। फिर भी हम हर जांच के लिए तैयार हैं।
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