कोरोना काल की वजह से जिले की अदालतों में हजारों केस सुनवाई के लिए लंबित पड़े हैं। हालांकि आपातकालीन स्थिति को देखते हुए केवल बेल, स्टे आदि केसों की सुनवाई ही हो रही है। ऐसे में ज्यादातर अधिवक्ताओं के पास काम नहीं है। सक्षम अधिवक्ता तो इसे संकटकाल को झेल ले रहे हैं लेकिन बाकी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कई तो ऐसे हैं, जिन्होंने अपना पेशा ही बदल दिया है या बदलने का मन बना रहे हैं। कोर्ट बंद होने पर उनसे जुड़े तमाम अन्य लोग भी परेशान चल रहे हैं।
तमाम अधिवक्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस ने उनके काम पर ग्रहण लगा दिया है। तमाम नए वकील पेशा छोड़ने को मजबूर भी हुए हैं। जिला बार कांउसिल के पदाधिकारियों ने जरूरतमंद अधिवक्ताओं के लिए सरकार से 50 लाख रुपये आर्थिक सहायता की मांग की है। कोरोना काल के साथ अब ग्रीष्मकालीन अवकाश में 30 जून से कोर्ट बंद हो जाते हैं। ऐसे में सरकार को जरूरतमंद अधिवक्ताओं की मदद के लिए आगे आना चाहिए। जिले के कोर्ट कांप्लेक्स में 21 अदालत लगती हैं। इनमें 11 सेशन कोर्ट और 8 जेएमसी कोर्ट शामिल हैं। इसके अलावा दो कोर्ट समालखा में भी हैं। इनमें एक डीजे यानी डिस्ट्रिक्ट सेशन जज और 10 एडीजे यानी एडिशनल डिस्ट्रिक्ट सेशन जज बैठते हैं। जिले में करीब 2500 अधिवक्ता इनमें काम करते हैं।
500 की सहायता कर चुकी है बार काउंसिल
प्रदेश बार काउंसिल अब तक करीब 500 जरूरतमंद वकीलों को 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि दे चुकी है। कोरोना से मौत होने पर अधिवक्ताओं के परिजनों को एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। जिले के दो अधिवक्ता कोरोना से जिंदगी की जंग हार चुके हैं। एक अनुमान के मुताबिक, यहां की 21 अदालतों में 50 से 60 हजार लंबित केस होने से अधिवक्ताओं की परेशानी बढ़ी है।
कोरोना काल की वजह से कई अधिवक्ता आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। सरकार से उनकी मदद की गुजारिश है। काउंसिल भी अपने स्तर पर उनकी मदद के लिए तत्पर है। बात आर्थिक संकट की हो या बीमारी आदि से मृत्यु की, कांउसिल अपने अधिवक्ताओं के साथ खड़ी है।
- शेर सिंह खर्ब, प्रधान बार काउंसिल, पानीपत
जिले में कुछ ऐसे अधिवक्ता भी हैं, जिनका पेशा ही कोरोना की वजह से चौपट हो चुका है। रोजगार न मिलने से कुछ जरूरतमंद अधिवक्ता बहुत परेशान हैं। इसके लिए वे दूसरी जगह पर प्राइवेट जॉब तक कर रहे हैं। भविष्य के लिए यह स्थिति ठीक नहीं है।
- अनिल सिंगला, उप प्रधान, बार काउंसिल, पानीपत
जिले में सबसे ज्यादा केसों की संख्या चेक बाउंस मामलों की है। इन मामलों की तारीख भी एक से डेढ़ साल बाद तक की लगती है। हाल ही में एक केस की तारीख 2022 में मिली है। समझा जा सकता है कि अधिवक्ताओं के लिए यह कितनी दिक्कत भरा समय है।
- संदीप भौक्कर, सह सचिव, बार काउंसिल, पानीपत
तमाम अधिवक्ताओं के लिए काम न होने पर घर चलाना मुश्किल भरा है। पंजाब सरकार ने पंजाब में बार काउंसिल को एक करोड़ रुपये की मदद की है। इसी प्रकार हरियाणा सरकार से मांग है कि जरूरतमंद वकीलों के लिए वह कम से कम 50 लाख रुपये की मदद करें।
- मनोज शर्मा, कैशियर, बार काउंसिल, पानीपत