माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र करनाल में घटते गन्रा रकबा और पैदावार को लेकर चल रहे किसान प्रशिक्षण के दूसरे दिन बिहार राज्य के किसानों को पेड़ी प्रबंधन के साथ-साथ खरपतवार व उर्वरक प्रबंधन के तरीके सिखाए गए। किसानों ने गन्ने की फसल को लेकर कई आशंकाएं भी व्यक्त कीं। वैज्ञानिकों ने उनकी आशंकाओं का समाधान किया।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मेहरचंद ने सस्य क्रियाओं को समझाते हुए पेड़ी प्रबंधन का बारे में बताया। किसानों ने बताया कि बिहार में मोथा नामक खरपतवार एक बड़ी समस्या बन रहा है।
जिसके निदान के लिए उन्होंने किसानों को सैंपरा नामक दवाई का प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ध्यान रखें कि इस दवा का प्रयोग तभी करें, जब खेत में पर्याप्त नमी हो और मोथा की अवस्था तीन से चार पत्तियों वाली हो। ऐसी अवस्था में इसका सफल निदान संभव है।
गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र करनाल के अध्यक्ष डॉ. एमएल छाबड़ा ने रोग प्रबंधन पर गन्ने से सबसे प्रमुख रोग लाल सड़न पर विस्तार से जानकारी दी। बिजाई के समय गन्ने की ऊपरी दो तिहाई हिस्से से दो दो आंख वाले टुकड़े करें। उन्हें 0.1 प्रतिशत थायोफिनेट मिथाइल नामक दवा के घोल में कम से कम एक घंटे तक बीज शोधन करें।