करनाल। दुर्घटनाओं के मामले में सदर थाना क्षेत्र की सड़कें जिले में सबसे खतरनाक साबित हो रही हैं। यहां पर औसतन तीन दिन में दो लोगों के खून से सड़क लाल हो रही हैं।
थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बलड़ी चौक से झंझाड़ी तक, पश्चिमी बाईपास, कैथल रोड पर चिड़ाव मोड़ व इंद्री मार्ग पर सबसे ज्यादा हादसे हुए।
यहां सड़क की खामी के अलावा वाहन चालकों की लापरवाही भी हादसे की वजह रही। ऐसे में आमजन को यहां पर चलते हुए और सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि जिला प्रशासन महज साइन बोर्ड लगाकर लोगों को जागरूक करने तक सीमित है। जबकि सड़कों की हालत खराब है।
(इंटिग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस) आईआरएडी की रिपोर्ट के अनुसार, थाना सदर क्षेत्र में वर्ष 2024 में सर्वाधिक 102 सड़क हादसे हुए। जिनमें 241 लोग सड़क हादसे का शिकार हुए। इनमें से 50 लोगों की मौत हुई। जबकि 29 लोग अपाहिज हुए और 49 लोगों को कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
चूंकि सदर थाना का क्षेत्र जिले में सबसे बड़ा थाना क्षेत्र है। थाना प्रभारी विष्णु मित्र के अनुसार, थाना के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-44, कैथल व इंद्री राजमार्ग के अतिरिक्त काछवा और असंध मार्ग की करीब 55 किलोमीटर लंबी सड़कें हैं। इसके अलावा थाना क्षेत्र में इन्हीं मार्गों से जुड़े 56 गांव भी पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी तरफ से सड़क सुरक्षा संबंधित प्रयास और हादसाग्रस्त लोगों को तुरंत मदद पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
इधर, सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एडवोकेट राजकुमार, संदीप राणा और तेजपाल ने प्रशासन ने सदर थाना क्षेत्र के अधीन आने वाली सड़कें और हादसा संभावित बिंदुओं पर सड़क सुरक्षा संबंधित गतिविधियां और लापरवाही करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई बढ़ाने की मांग की है। उनका मानना है कि जितनी लापरवाही वाहन चालकों की है उतनी ही लापरवाही प्रशासन की भी है, क्योंकि सड़क सुरक्षा की दृष्टि से भी सड़कों की हालत खराब है।
जिले के 15 थाना क्षेत्रों में सबसे ज्यादा 14.5 प्रतिशत लोग सड़क दुर्घटना का शिकार केवल सदर थाना क्षेत्र में हुए हैं। आईआरएडी की जिला प्रबंधक स्वाति गुप्ता का कहना है कि यह आंकड़ा चौकाने वाला है। क्योंकि जिले में 1680 लोग दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं, इनमें 14.5 प्रतिशत यानी 241 लोग इसी क्षेत्र के हैं। इसके अलावा मौत के कुल आंकड़े 320 में से 16 प्रतिशत यानी 50 यहां की हैं।