माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सड़क पर चलते हुए चालक की लापरवाही के कारण सबसे ज्यादा सड़क हादसे हो रहे हैं। ऐसे में सड़कों को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ इस पर चलने वाले लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है। इसके लिए अब तक केवल सामान्य प्रयास ही होते आए हैं, अब व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर ही जागरूक किया जाए तो ही कुछ बात बन सकती है। इसके अलावा पुलिस को सख्ती से पहले प्रशासन को सड़कों के हालात को भी दुरुस्त करना होगा। यह कहना है शिक्षक एवं शिक्षाविदों का।
अमर उजाला कार्यालय में बुधवार को सड़क सुरक्षा विषय पर संवाद का आयोजन हुआ। जिसमें स्कूल और कॉलेजों के प्रिंसिपल व शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सभी ने कहा कि युवा ही हादसों का शिकार सबसे ज्यादा हो रहे हैं, इस पर और काम करने की जरूरत है। युवाओं का अगर माइंड सेट ही ऐसा बना दिया जाए कि तेज रफ्तार से वाहन न चलाएं और सड़क पर चलते हुए सभी यातायात नियमों का पालन करें तो हादसे रुक सकते हैं।
चालकों का रिफ्रेशर कोर्स होना जरूरी
जिला विज्ञान विशेषज्ञ दीपक वर्मा ने कहना है कि ड्राइविंग को लेकर हर व्यक्ति का रिफ्रेशर कोर्स भी होना चाहिए। ताकि उसे सड़क पर चलते हुए जिम्मेदारी का पता चले। लापरवाही के कारण ही हादसे होते हैं।
व्यापक स्तर पर जागरूकता जरूरी
जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की वाइस प्रिंसिपल आंचल गोयल का कहना है कि स्कूलों में यातायात सुरक्षा पर गतिविधियां होती हैं लेकिन व्यापक स्तर पर काम करने की जरूरत है। युवाओं को जागरूक करना होगा।
अभिभावकों को समझनी होगी जिम्मेदारी
वीपी इंटरनेशनल स्कूल की हिंदी शिक्षिका हरप्रीत कौर का कहना है कि छोटे बच्चों की सड़क सुरक्षा पर विशेष क्लास होनी चाहिए। क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ वाहन चलाने की जिद भी बच्चे ही करते हैं, अभिभावक जिम्मेदारी समझें।
बच्चों के लिए लगना चाहिए प्रतिबंध
वीपी इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल अनिता खुराना का कहना है कि स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए दो पहिया वाहन पूरी तरह से प्रतिबंधित होने चाहिए। उनके स्कूल ने यह प्रतिबंध लगाया हुआ है, कई बच्चे बाहर वाहन खड़ा करके आते हैं।
सड़कों को भी दुरुस्त करना होगा
एनएसक्यूएफ के जिला समन्वयक सत्येंद्र तिवारी का कहना है कि पुलिस की सख्ती के साथ-साथ सड़कों को भी दुरुस्त करना जरूरी है। कई चौराहों पर जैबरा क्रॉसिंग ही गलत बने हैं। ट्रैफिक लाइटें भी खराब हैं।
हेलमेट के लिए सख्ती जरूरी
दयाल सिंह कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. जयकुमार का कहना है कि हेलमेट के बिना वाहन चलाने पर तो सख्ती होनी ही चाहिए। उनके कॉलेज में बिना हेलमेट आने वाले वाहन चालक को प्रवेश नहीं दिया जाता।
बच्चों का माइंड सेट बनाना पड़ेगा
समग्र शिक्षा के एपीसी डॉ. सचिन का कहना है कि सड़क सुरक्षा को लेकर बचपन से ही माइंड सेट बनाना होगा। तभी हादसों पर लगाम लगेगी। बच्चों को जानकारी देने के लिए ट्रैफिक पार्क लेजाना चाहिए। पाठ्यक्रम में भी शामिल होना चाहिए।
बड़े वाहनों के चालकों को करें जागरूक
जिला गणित विशेषज्ञ सुमित मान का कहना है कि 16 से 35 साल की उम्र के युवा ही हादसों का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा ट्रक और बस की टक्कर के मामले सामने आते हैं। बड़े वाहनों के चालकों को जागरूकता की जरूरत है।
नशे की हालत में स्कूल आ रहे बच्चे
टैगोर बाल निकेतन के शिक्षक सुनील कांबोज का कहना है कि यातायात नियमों की अवहेलना के साथ स्कूलों में नशे की हालत में बच्चे पहुंच रहे हैं। इस पर भी काम करने की जरूरत है। अभिभावक घर से ही बच्चों की जांच व सख्ती करें।
अभिभावकों को मजबूत होना पड़ेगा
राजकीय पीजी कॉलेज के एनसीसी अधिकारी प्रो. सुरेश दुग्गल का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों को मजबूत होना होगा। जब तक बच्चे पूरी तरह से वाहन चलाने में प्रशिक्षित न हों, तब तक वाहन नहीं देना चाहिए।
घरों के चिराग बुझने से बचाने होंगे
अध्यापक संघ के जिलाध्यक्ष रमेश शर्मा का कहना है कि घरों के चिराग बुझने से बचाने होंगे। बच्चों को प्यार दें, प्रेशर नहीं। डंफर और ट्रॉली ओवरलोड चल रहे हैं, प्रशासन कार्रवाई करे तो ऐसा कभी नहीं हो सकता।
ई-रिक्शा के कारण लगता है जाम
हिंदी प्राध्यापक कृष्ण कुमार निर्माण का कहना है कि ई-रिक्शा के कारण शहर में सबसे ज्यादा हादसे होते हैं और जाम लगती है। इनमें ड्राइविंग सेंस विकसित करनी होगी। तभी हालात में सुधार हो सकता है।
तेज रफ्तार का एक कारण जाम भी
अध्यापक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल सैनी का कहना है कि तेज रफ्तार का कारण जाम भी है। क्योंकि हाईवे पर वही चालक ज्यादा तेज वाहन दौड़ाता है, जो जाम के कारण लेट होता है और उसे आगे पहुंचने की जल्दी हो।