संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश करनाल रामावतार पारीक की अदालत ने संपत्ति के अधिकारों और सुखाधिकार पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी किसान के पास अपने खेत तक पहुंचने का कोई अन्य वैकल्पिक मार्ग नहीं है, तो वह ‘आवश्यकता के सुखाधिकार’ के तहत पड़ोसी की ज़मीन से रास्ता पाने का हकदार है। भले ही राजस्व रिकॉर्ड में उस रास्ते का औपचारिक जिक्र न हो।
अदालत ने यह फैसला इंद्री तहसील के नौरता गांव के एक मुकदमे में सुनाया। नौरता गांव निवासी अपीलकर्ता रघबीर चंद की शिकायत थी कि प्रतिवादी दर्शन लाल ने उनके खेत (किला नंबर 7) तक जाने वाले 11 फीट चौड़े रास्ते को ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर दिया है। रघबीर के अनुसार उन्होंने ज़मीन वर्ष 1982 में खरीदी थी। तब से वह इसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे। उनके मुकदमे को सिविल जज इंद्री ने वर्ष 2019 में यह कहकर खारिज कर दिया था कि सरकारी रिकॉर्ड (जमाबंदी) में यह रास्ता दर्ज नहीं है। फैसले के खिलाफ रघबीर चंद ने जिला अदालत में अपील दायर की थी।
अपील पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रामावतार पारीक ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि बिना रास्ते के किसान अपनी ज़मीन का उपयोग नहीं कर सकता, जो उसके मौलिक अधिकारों और आजीविका से जुड़ा है। भले ही राजस्व रिकॉर्ड में रास्ता दर्ज न हो, लेकिन यदि ज़मीन के बंटवारे के इतिहास से यह पता चलता है कि वह हिस्सा पहले एक ही था, तो ‘आवश्यकता का सुखाधिकार’ लागू होता है।
रास्ते के बदले देनी होगा जमीन का हिस्सा
अदालत ने न्याय के संतुलन को बनाए रखने के लिए आदेश दिया कि वादी (रघबीर चंद) को रास्ता तो मिलेगा, लेकिन वह प्रतिवादी की निजी ज़मीन का नुकसान करके ‘मुफ्त’ में रास्ता नहीं ले सकता। अदालत ने आदेश दिया कि प्रतिवादी को अपने खेत (किला नंबर 3 या 4) से 11 फीट का रास्ता देना होगा। बदले में वादी को रास्ते के बराबर की अपनी ज़मीन प्रतिवादी के खेत के साथ जोड़नी होगी। इसके अलावा अगर आदेश जारी होने के 60 दिनों के भीतर दोनों पक्ष आपसी सहमति से रास्ता तय नहीं करते हैं, तो राजस्व अधिकारी मौके पर जाकर ज़मीन की पैमाइश करेंगे और नया नक्शा बनाएंगे और सरकारी रिकॉर्ड में रास्ता दर्ज करेंगे। यह फैसला उन सैकड़ों किसानों के लिए नजीर बनेगा जिनके खेत ‘लैंडलॉक्ड’ (चारों तरफ से अन्य खेतों से घिरे) हैं और पड़ोसी रास्ता देने से इनकार करते हैं।
सुखाधिकार
सुखाधिकार एक कानूनी अधिकार है जो किसी संपत्ति के मालिक (प्रमुख स्वामी) को किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए किसी दूसरे व्यक्ति की जमीन (अधीनस्थ भूमि) का उपयोग करने की अनुमति देता है, बिना उस जमीन का स्वामित्व बदले जैसे रास्ता (मार्ग), पानी या बिजली की लाइन ले जाने या हवा-रोशनी पाने के लिए, और यह अधिकार भूमि के स्वामित्व बदलने पर भी लागू रहता है।