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वीर जवानों के शौर्य को मीठा सलाम: ऑपरेशन सिंदूर के जांबाजों के सम्मान में नई किस्म सिंदूर आम, इसकी कई खासियतें

Sun, 27 Jul 2025 06:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा देव शर्मा, करनाल

सार

हरियाणा के वैज्ञानिकों ने आम की एक अनोखी किस्म तैयार की है। इसका नाम रखा है-सिंदूर। यह आम केवल गर्मियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सितंबर में भी मिलेगा। 
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सिंदूर आम... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की जिस सफलता ने दुनिया में देश का गौरव बढ़ाया है, उसे सलाम करने के लिए हरियाणा के वैज्ञानिकों ने आम की एक अनोखी किस्म तैयार की है। इसका नाम रखा है-सिंदूर। यह आम केवल गर्मियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सितंबर में भी मिलेगा। 

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इसकी पौध 2026 से पूरे देश में उपलब्ध होगी। इसकी एक और खासियत यह है कि इसमें शर्करा की मात्रा बेहद कम है, इसलिए मधुमेह के मरीज भी इसका स्वाद ले पाएंगे। इस खास किस्म को विकसित करने का श्रेय राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के पूर्व निदेशक और वर्तमान में गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर, उत्तराखंड के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान को जाता है। 

उनके निर्देशन में ही वैज्ञानिकों ने इसे तैयार किया। शोध को लेकर डॉ.मनमोहन सिंह ने बताया कि यह मात्र कृषि की एक नई उपलब्धि नहीं है, बल्कि सैनिकों को समर्पित एक मीठा सलाम है। ऑपरेशन सिंदूर में शामिल जांबाजों की वीरता और बलिदान को याद रखने का एक अनोखा तरीका है। 
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हर बार जब कोई इस आम का स्वाद चखेगा, तो वह हमारे सैनिकों की बहादुरी को महसूस करेगा। हर फल उनकी वीरता और बलिदान की कहानी कहेगा। यह किस्म पहले से तैयार की जा रही थी। इसी बीच आपरेशन सिंदूर हो गया। इस कारण इसका नाम सिंदूर रखा गया। यह आम भी सिंदूर के रंग का है।

सिंदूरी आम से बिल्कुल अलग
यह आम मार्केट में उपलब्ध सिंदूरी आम से अलग होगा। इसका वजन 150 से 200 ग्राम के बीच होगा।  जुलाई व अगस्त में बारिश व तेज हवाओं से इसके बाैर (फूल) को कोई नुकसान न पहुंचे और सितंबर तक इसका पेड़ फल देता रहे। आम में मिठास भले ही हल्की होगी लेकिन खाने में अत्यधिक स्वादिष्ट होगा। इस कारण मधुमेह रोगी भी इसे खा सकेंगे।

बेमौसम मिलेगा ताजा आम
यह आम का सीजन खत्म होने के बाद लोगों के हाथों में पहुंचेगा। सितंबर के महीने में पककर तैयार होगा। इसका सीधा फायदा आम उत्पादक किसानों को मिलेगा और देशभर के लोग भी सितंबर तक आम का स्वाद ले सकेंगे। संभावना है कि अगले साल किसानों को पौध को दे देंगे। देशभर में जहां भी मांग होगी, पौध को वहीं उपलब्ध कराया जाएगा।
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-डॉ. मनमोहन सिंह चौहान, कुलपति, जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर

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