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एजेंसियाें के निशाने पर आए मिलर

Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
Karnal
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कैथल। गुहला चीका में अब तक के इस सीजन के धान की हुई खरीद की जांच की जाएगी। गुहला में इस सीजन में अभी तक 14 लाख क्विंटल से से अधिक का धान खरीदा गया है। यह खरीद करीब 55 मिलरों के साथ मिलकर हुई है। कानफेड के लिए की गई खरीद में एक मिलर द्वारा धान की अधिक मात्रा दिखाए जाने के बाद उजागर हुई गड़बड़ी के बाद सभी एजेंसियों में हड़कंप मचा हुआ है तथा सभी एजेंसियों ने अपने स्तर पर मिलराें के साथ मिलकर हुई खरीद की जांच शुरू कर दी है। मालूम हो कि गुहला चीका में कानफेड के लिए खरीदी गई धान में एक मिलर ने 50 हजार क्विंटल अधिक धान दिखाया है। उक्त मिलर का दावा है कि वह खरीदे गए पूरे धान का चावल उपलब्ध करवाने को तैयार है।
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14 लाख से अधिक खरीद
गुहला-चीका में अभी तक विभिन्न एजेंसियों द्वारा 14 लाख 10 हजार 100 क्विंटल धान की खरीद हुई है। इसमें कानफेड द्वारा 16 मिलरों की सहायता से 4 लाख 73 हजार 520 क्विंटल, डीएफएससी द्वारा 23 मिलरों की सहायता से 4 लाख 86 हजार 180 क्विंटल, हैफेड द्वारा 10 मिलरों की सहायता से 3 लाख 17 हजार 980 क्विंटल और वेयरहाउस कारपोरेशन द्वारा छह मिलरों की सहायता से एक लाख 32 हजार 420 क्विंटल धान खरीदा गया है।
पूरी खरीद की जांच शुरू
डीएफएससी सुरेंद्र सैनी ने बताया कि वैसे तो 15 दिन बाद खरीदे गए धान की जांच की जाती है लेकिन कानफेड की खरीद में उजागर हुई गड़बड़ी के बाद सभी एजेंसियां अपने स्तर पर जांच करवा रही हैं। वहीं हैफेड के जिला प्रबंधक वीपी मलिक ने बताया कि हैफेड द्वारा धान की खरीद के समय भी पूरी सावधानी बरती गई है ताकि किसी तरह की कोई गड़बड़ी न हो।
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आढ़तियों को बनाया जा रहा निशाना
अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई से बचने की फिराक में
पुलिस को भी दी जा चुकी है मामले की सूचना, पुष्टि नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला चीका। चीका में हुए करोड़ों रुपये की धान खरीद गड़बड़ी के बाद भी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इस मामले में कोई भी कार्रवाई करने से बचते दिखाई दे रहे हैं। करोड़ों रुपये के इस घोटाले का खुलासा हुए 16 दिन से भी अधिक का समय बीतने के बाद भी विभाग द्वारा किसी भी दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। केवल निर्दोष आढ़तियों का बकाया रोककर अपने कार्य की इतिश्री कर ली है। हालांकि विभाग के जिला प्रबंधक भी इस घोटाले की पुष्टि कर चुके हैं लेकिन किसी दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की बजाए आढ़तियों के करोड़ों रुपये का भुगतान रोक आढ़तियों और किसानों के लिए एक नई मुसीबत पैदा कर दी है। व्यापारियों और किसानों का कहना है कि जब यह सारा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत में ही हुआ है तो जांच के नाम पर आढ़तियों का करोड़ों रुपये का भुगतान रोककर उन्हें क्यों परेशान किया जा रहा है।
वर्जन
हरियाणा कानफेड के चेयरमैन बजरंग दास गर्ग ने कहा कि मामले की गहनता से जांच करवाई जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। व्यापारियों का भुगतान जल्द से जल्द करवाया जाएगा ताकि व्यापारी और किसानों को आर्थिक तंगी का सामना न करना पडे़।

बसूलेंगे अपना बकाया
धान खरीद में गड़बड़ी के उजागर होने के बाद आढ़तियों के रोके गए करोड़ों रुपये के बकाए को लेेने के लिए आढ़ती भी अब लामबंद होने लगे हैं। आढ़तियों ने कहा कि जब निर्धारित समय पर धान की गाड़ी लेट होने पर उनसे विभाग ब्याज बसूलता है तो वह भी अपना बकाया निर्धारित समय पर न मिलने के बाद ब्याज सहित बसूलेंगे। चाहे इसके लिए उन्हें न्यायालय का दरवाजा क्यों न खटखटाना पडे़।

रसूखदारों का प्रभाव
सूत्रों के अनुसार विभाग के जिला प्रबंधक द्वारा पुलिस को इस संबंध में लिखित रूप में सूचित भी किया जा चुका है लेकिन इसके बाद भी पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करना इस घोटाले में कई रसूखदारों के होने की आशंका को भी दर्शाता है। यदि पुलिस निष्पक्ष जांच करे तो विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी इसके लपेटे में आएंगे ही साथ ही आधा दर्जन अन्य लोग भी उक्त घोटाले से बच नहीं सकते। हालांकि उक्त घोटाले से जुडे़ कुछ लोग उक्त मामले से बचने के लिए विधि विशेषज्ञों से सलाह मशवरा करते देखे गए।
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