करनाल। एक आरटीआई कार्यकर्ता ने डीआईपीआरओ से वर्ष 2010 से लेकर अब तक पत्रकारों के आथित्य पर खर्च की गई राशि का ब्यौरा मांगा है। पूछा गया है कि इस अवधि में सरकार की तरफ से कितना बजट आया है और इसे किन-किन मदों पर खर्च किया गया है। साथ ही बिलों की सत्यापित प्रति भी मांगी गई है।
आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा ने कहा है कि उन्हें विश्वस्त सूत्रों से पता चला था कि सरकारी आदेशों को दरकिनार कर विभाग के अधिकारी मनमानी ढंग से चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए उनके कार्यक्रमों की कवरेज कर रहे हैं। सरकार द्वारा जो बजट जारी किया जाता है, उसे भी इन कार्यक्रमों पर खर्च कर दिया जाता है। पूछा गया है कि प्रोटोकोल और रूल एंड रेगुलेशन के तहत डीआईपीआरओ कार्यालय किस कैटागिरी के जनप्रतिनिधियों की कवरेज पत्रकारों को भेज सकते हैं।
इस संबंध में सरकार की तरफ से जारी निर्दोशों की प्रति भी मांगी गई है। डीआईपीआरओ कार्यालय कौन-कौन से गतिविधियों की कवरेज पत्रकारों को भेज सकते हैं और निजी कार्यक्रम या स्कूल से संबंधित खबरें किना आदेशों के तहत भेजी जाती है। 28 अक्टूबर 2012 को एक विशिष्ट अतिथि ने डीएवी कॉलेज में शिरकत की थी, उनके संबंध में जानकारी मांगी गई है। पूछा गया है कि वे कौन थे और उनकी कवरेज की गई या नहीं। यदि नहीं तो क्यों?
सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए दो साल में खर्च बजट का ब्यौरा भी मांगा गया है।
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जयभगवान/पुरुषोत्तम