अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। करनाल से विधायक और प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में चल रही भाजपा सरकार में करनाल के लिए चार साल खास रहे हैं। विकास का बात करें तो यहां पर विकास के लिए घोषणाओं की कोई कमी नहीं रही। सीएम ने दिल खोलकर एक के बाद एक घोषणाएं कीं। करनाल विधानसभा से लेकर इंद्री, घरौंडा, असंध व नीलोखेड़ी सभी के लिए करोड़ों रुपये की घोषणाएं कीं। बस कमी रही तो उन्हें जमीन पर लाने की। जिले में तैनात अधिकारियों ने या इन घोषणाओं को गंभीरता से नहीं लिया, अगर लिया होता तो चार साल में करनाल के हालात बदले होते। बेशक करनाल में करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाएं शुरू हुई हैं, लेकिन सड़कें सारी घोषणाओं का मजाक उड़ा रही हैं।
पिछले चार साल के आंकड़े बताते हैं कि सीएम मनोहर लाल ने कुल 420 घोषणाएं की हैं। इनमें से केवल 181 ही पूरी हो पाई हैं, जबकि 182 घोषणाएं ऐसी हैं जो पाइप लाइन में हैं। 57 घोषणाएं ऐसी हैं जिनके एस्टीमेट तक नहीं बन पाए। इन सभी घोषणाओं पर करीब 2024 करोड़ रुपये खर्च किया जाना है, लेकिन अभी तक इन पर 327 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। ऐसे में सीधा सा अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी विकास कार्य होने में गति धीमी है। सभी कार्य पूरे होने में अभी और समय लगेगा।
ये मिला
-मेडिकल कालेज
-स्मार्ट सड़क
-कर्ण ताल
-कर्ण पार्क
-स्वामी विवेकानंद पार्क
-56 करोड़ रुपये का बाईपास
सड़कें अभी हैं खस्ताहाल, चार सड़कों पर चल रहा फोरलेन का कार्य
आंकड़ों की बात करें तो सड़कों पर करीब 147 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। हालांकि, अभी करनाल की सड़कें गड्ढों से भरी पड़ी हैं। अच्छी खबर ये है कि करनाल से निसिंग, करनाल से काछवा, करनाल से इंद्री और करनाल से बड़ौता तक सड़कों को फोरलेन करने का कार्य चल रहा है। इसी प्रकार बाईपास बन कर तैयार है, लेकिन रेलवे ओवरब्रिज का कार्य अभी शेष है। शहर की सबसे पुरानी व खास ठंडी सड़क में गड्ढे ही गड्ढे नजर आ रहे हैं। जबकि यहां पर जिला प्रशासन के तमाम आला अधिकारी रहते हैं। इसके अलावा, शहर के अंदर व सेक्टरों की सड़कों के हालात भी खराब हैं।
मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी मिले, डॉक्टरों का इंतजार
पिछले चार साल में करनाल को मेडिकल कॉलेज का लाभ मिला। हालांकि, अभी तक मेडिकल यूनिवर्सिटी का इंतजार खत्म नहीं हो पा रहा है। अभी तक इसका आ धिकारिक तौर पर शिलान्यास पत्थर तक नहीं रखा गया है। बावजूद इसके यहां पर फिजियोथैरेपी का कालेज चलाने को लेकर स्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इसी प्रकार, बागवानी विश्वविद्यालय की भी केवल घोषणा की है। जमीनी स्तर पर इसके लिए कोई काम नहीं हुआ है। सबसे बड़ी बात ये है कि मेडिकल कॉलेज में आज भी मरीजों को डाक्टरों का इंतजार है।
ये प्रोजेक्ट हैं प्रोसेस में
-8 करोड़ से कर्ण स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण
-7 करोड़ से डॉ. मंगलसेन आडिटोयियम का निर्माण
-करनाल से इंद्री सड़क का फोरलेन होना
-हवाई पट्टी का विस्तारीकरण होना