बहरों के कान खोलने के लिए धमाके करने पड़ते हैं
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। एक बार भगत सिंह ने कहा था कि ‘बहरों के कान खोलने के लिए धमाके करने पड़ते हैं’। ट्रांसफार्मर के लिए कुछ ऐसा ही धमाका किया शामगढ़ के किसान जसविंद्र ने तो आखिरकार बिजली निगम को झुकना पड़ा। निगम ने तो तोड़फोड़ के आरोप में किसान को जेल में डाल दिया, लेकिन खेत को ट्रांसफार्मर मिल गया। निगम में भी ट्रांसफार्मर की खेप आ गई।
वदित हो कि खराब ट्रांसफार्मर नहीं बदले जाने से परेशान शामगढ़ के किसान जसविंद्र ने 24 जून को तरावड़ी स्थित बिजली निगम के दफ्तर पहुंचकर तोड़फोड़ की थी। वहां सचिवालय के मेन गेट के सामने सड़क पर ट्रांसफार्मर को रख कर आग लगा दी। इसके बाद बिजली निगम की शिकायत पर पुलिस ने किसान को हिरासत में ले लिया। किसान की ओर से अपनी जमानत न कराने पर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वहीं इस सबके बीच निगम ने पूरे मामले की जांच कर किसान के पिता को नया ट्रांसफार्मर उपलब्ध करा दिया है। सब अर्बन डिवीजन-1 के एक्सईएन विनोद कुमार गोयल ने कहा कि किसान जसविंद्र ने ट्रांसफार्मर मिलने में देरी का जो आरोप लगाया है, वह जांच में गलत पाया गया है। निगम रिकार्ड के अनुसार किसान ने नए ट्रांसफार्मर के लिए 22 जून को आवेदन किया था, अगर इससे पहले उसने मौखिक तौर पर किसी से कहा हो तो उसकी जानकारी नहीं है। वहीं कर्मचारी द्वारा पैसे मांगे जाने की बात भी साबित नहीं हो पाई।
किसान महापंचायत कल
ट्रांसफार्मर को आग लगने के बाद मामला गरमाता जा रहा है। किसान के पक्ष में और निगम की ओर से ट्रांसफार्मर वितरण में गड़बड़ी के खिलाफ किसान 29 जून को भाकियू के बुलावे पर शामगढ़ में महापंचायत करने जा रहे हैं। पंचायत की तैयारियों को लेकर मंगलवार को भाकियू नेता राजेन्द्र आर्य दादूपुर ने अन्य नेताओं के साथ सैनी धर्मशाला का दौरा किया। दादूपुर ने बताया कि बिजली वितरण निगम खराब ट्रांसफार्मरों को बदलने को लेकर लापरवाही बरत रहा है। भाकियू नेता किसान जसविंद्र के निवास पर भी पहुंचे। उनके परिजनों को विश्वास दिलाया कि किसान उनके परिवार के साथ है। सरकार के साथ निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। किसान परिवार ने भी सारा मुद्दा भाकियू को सौंप दिया है। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष बाबूराम बड़थल, बाबूराम डाबरथला, अमर सिंह, बनारसी दास, रामचंद्र, राजेंद्र पोपली, दिवान सिंह, दिलबाग सिंह, बालकिशन, राजपाल, रवि आदि मौजूद रहे।