अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। 17 दिन से हड़ताल पर चल रहे रोडवेज कर्मचारियों ने शनिवार को हड़ताल खत्म कर दी लेकिन वहीं आउटसोर्सिंग पॉलिसी टू के तहत लगाए गए कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया और कर्ण पार्क में बैठकर मीटिंग की। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि उनकी सेवाएं निरस्त ना की जाएं।
हड़ताली कर्मचारी सुबह नौ बजे ड्यूटी पर लौटना शुरू हो गए। 10 बजे तक एक के बाद सभी को ड्यूटी अलॉट कर दी गई। हड़ताल से पहले बस स्टैंड की जैसी स्थिति थी वैसी शनिवार को भी देखने को मिली। सभी बसों को लोकल रूटों व बाहर के रूटों पर दौड़ाया गया। 17 दिन के बाद हड़ताल से काम पर लौटे कर्मचारियों के चेहरे पर खुशी का माहौल था। सभी बसें चलने के कारण बस अड्डे पर भी ज्यादा भीड़ देखने को नहीं मिली। माहौल ऐसा था कि जनजीवन जैसे पटरी पर लौट आया हो। 172 बसें रोडवेज की आन रूट कर दी गई।
जीएम से मिले आउटसोर्सिंग के कर्मचारी
सरकार के निर्देश पर आउटसोर्सिंग पॉलिसी टू के तहत हड़ताल के दौरान जिन कर्मचारियों को एजेंसी के माध्यम से हायर किया गया, उनकी सेवाएं निरस्त कर दी गई हैं। हालांकि सेवाएं समाप्त होने से क्षुब्द कर्मचारियों ने सुबह बस स्टैंड पर रोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनके साथ अन्याय किया है। रोष जाहिर करने के बाद कर्मचारी जीएम रोडवेज से मिले। जीएम प्रद्युमन सिंह ने कहा कि उनको आउटसोर्सिंग एजेंसी के तहत केवल हड़ताल तक ही काम के लिए हायर किया गया था। उन्हें जब हायर किया गया था तभी स्पष्ट शब्दों में बता दिया गया था। ऐसे में विरोध का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता।
दूसरे विभागों के कर्मचारी भी अपनी ड्यूटी पर वापस लौटे
हड़ताल के दौरान दूसरे विभागों से हायर किए गए कर्मचारी भी वापस लौट आए हैं। हड़ताल के कारण फायर ब्रिगेड, आरटीए, पुलिस विभाग व अन्य विभागों से कर्मचारियों को बसों पर तैनात किया गया था। इसके अलावा अप्रेंटिस पर भी जो छात्र आए थे उनको भी कंडक्टर की कमान सौंपी गई थी।