अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। एनडीआरआई में आयोजित राज्य स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन किसान मेले में कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि खेत में आग लगाना मां के गर्भ में आग लगाने के समान है, मां की सेहत को बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। इसके लिए आज इस कार्यक्रम के माध्यम से मंत्री, विधायक सहित किसानों को संकल्प लेना होगा कि न हम कभी खेत में अवशेषों को जलाएंगे और न जलाने देंगे तभी पर्यावरण को बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि धरती मां है, यह सबका पोषण करती है, धरती का स्वास्थ्य ठीक होगा तो हमें स्वच्छ भोजन मिलेगा और वातावरण भी साफ-सुथरा रहेगा। उन्होंने किसानों को बधाई देते हुए कहा कि हरियाणा का किसान फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाने में अन्य प्रदेशों के किसानों से ज्यादा जागरूक हो चुका है। अब हरियाणा का किसान पराली को जलाने की बजाय खेत में ही आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से खेतों में ही नष्ट कर रहा है। इतना ही नहीं किसानों ने पराली से जैविक खाद बनाने की भी एक नई शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा फसल अवशेषों को खेतों में ही नष्ट करने के लिए कृषि यंत्रों पर 221 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है और प्रदेश में 1129 सीएचसी सेंटर खोले जा चुके हैं। इन सीएचसी के माध्यम से किसानों को कृषि यंत्र खरीदने पर 80 प्रतिशत अनुदान और प्रदेश में अब तक 3489 किसानों ने व्यक्तिगत कृषि यंत्र खरीदे हैं जिन पर हरियाणा सरकार द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान दिया गया है। इस अवसर पर घरौंडा विधायक हरविंद्र कल्याण, असंध विधायक सरकार बख्शीश सिंह सहित कृषि अधिकारी मौजूद रहे।
अवशेषों से इंडियन ऑयल तेल व अन्य पदार्थ बनाएगा
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के मंत्री कर्णदेव कांबोज ने कहा कि हरियाणा सरकार ने पराली के प्रबंधन के लिए इंडियन ऑयल से एमओयू किया है, शीघ्र ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। खेतों में बचे अवशेषों से इंडियन ऑयल द्वारा तेल व अन्य पदार्थ बनाए जाएंगे। उन्होंने किसानों से कहा कि वे खेतों में अवशेष जलाने का परहेज करें।
4800 खेतों में जलाई गई है पराली
हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने कहा कि इस वर्ष धान का उत्पादन करीब 59 लाख टन तक पहुंच चुका है जोकि अपने आप में एक रिकार्ड है। सेटेलाइट के माध्यम से पाया गया कि पूरे प्रदेश में करीब 4800 खेतों में पराली जलाई गई जोकि कुल का 0.8 प्रतिशत है। माना जाता है कि 100 किसानों में से एक किसान ने अपने खेत में पराली जलाई परंतु हरियाणा के बारे में गलत प्रचार किया गया स्थिति कुछ और है।
3500 किसानों ने खरीदे कृषि यंत्र
कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवराज संधू ने प्रदेश के सभी किसानों ने सहयोग किया, करीब 3500 किसानों ने सीएचसी के माध्यम से कृषि यंत्र खरीदे। कृषि विभाग के एडिशनल डायरेक्टर सुरेश गहलोत ने भी किसानों से पराली न जलाने की अपील की। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार हरियाणा में 40 प्रतिशत कम पराली जलाई गई है।
पर्यावरण को बचाने के लिए 1200 करोड़ दिए गए
चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. केपी सिंह ने कहा कि वातावरण का दूषित होना एक बहुत बड़ी चुनौती है, जब भी देश व समाज पर किसी प्रकार की चुनौती आई तो हरियाणा सामने आया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने पर्यावरण को बचाने के लिए करीब 1200 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब व राजस्थान को दिए। जिन किसानों के पास पराली के प्रबंधन के उपकरण नहीं है उनको हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ा।
139 पंचायतें,198 किसान व 22 अधिकारियों को किया संम्मानित
कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने फसल अवशेष प्रबंधन में सराहनीय कार्य करने वाली प्रदेश की 139 ग्राम पंचायतों, 18 एनजीओ, 198 किसानों तथा 22 अधिकारियों को सम्मानित किया। इनमें गुरुग्राम की 5, झज्जर की 7, मेवात की 5, रोहतक की 2, करनाल व यमुनानगर की 10-10, पलवल की 6, फरीदाबाद की 6, सिरसा, फतेहाबाद, कैथल व पंचकूला की 1-1, सोनीपत की 8, पानीपत की 19, हिसार की 5, जींद की 26, कुरूक्षेत्र की 10, अंबाला की 15 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इसी प्रकार सीएचसी के माध्यम से बेहतरीन सेवाएं देने वाली जिला में से एक-एक सैंटर को सम्मानित किया
फोटो संख्या- 30 अंबाला के उप कृषि निदेशक को किया सम्मानित
राज्य स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन सम्मेलन में कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने अंबाला जिला के उप कृषि निदेशक डॉ. गिरीश नागपाल को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव नवराज सनधु, कृषि निदेशक हरियाणा डीके बेहेरा व अन्य उचचाधिकारी भी मौजूद थे। उन्हें प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह दिया गया। यह सम्मान उन्हें कर्मठता, लक्ष्यों की प्राप्ति व किसानों को जागरूक करने के प्रयासों के दृष्टिगत दिया गया। राज्य भर मे फसल अवशेष प्रबंधन में अंबाला जिला उल्लेखनीय रूप से अग्रणी रहा है और जिसके कारण पराली आदि जलाने की घटनाओं में विगत वर्षों की तुलना में काफी कमी आई है। जिला के उप कृषि निदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने इस सम्मान का श्रेय जिले की उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ को दिया और कहा कि यह सम्मान जहां अंबाला जिला के लिए गौरव की बात है वही इसका श्रेय जिले के उपायुक्त को जाता है जिनके कुशल नेतृत्व व मार्गदर्शन के कारण ही अंबाला जिला फसल अवशेष प्रबंधन में राज्य भर के अग्रणी जिलों में रहा है।