करनाल। पवित्र गुफा अमरनाथ के पास बादल फटने और बारिश के कारण आए सैलाब को जिसने भी आंखों से देखा है, उसे ताउम्र नहीं भूल सकता। देखते ही देखते सैलाब से भंडारों के टेंट तहस-नहस हो गए। गनीमत रही कि भंडारा लगाने वाले सुरक्षित रहे। शुक्रवार की शाम मची तबाही के बाद पूरी रात सो नहीं सके और बाबा बर्फानी से सुरक्षा की प्रार्थना करते रहे। यह कहना है श्री अमरनाथ सेवा मंडल करनाल के प्रधान विजय सिंगला का, जो 45 सदस्यों के साथ पवित्र गुफा के पास भंडारा लगा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मंडल करनाल का भंडारा लोवर कैंप में था, इसलिए पानी के सैलाब से नीचे कम नुकसान हुआ, जबकि अपर कैंप में पानी का बहाव तेज था और पत्थर भी बरसे। इस कारण जानमाल का काफी नुकसान हुआ। देखते ही देखते आंखों के सामने ही टेंट और सामान बह गए। घटना के दो दिन बाद भी वह मंजर आंखों के सामने से नहीं हट रहा। रह-रहकर पहाड़ों से आता सैलाब जहन में कौंधता है। सिंगला के अनुसार भयानक दृश्य का खौफ ऐसा था कि शुक्रवार की रात को वे लोग सो नहीं पाए। पूरी रात आग जलाकर बैठे रहे और बाबा बर्फानी से सभी की सुरक्षा की प्रार्थना करते रहे। उन्होंने बताया कि फिलहाल गुफा के पास 12 भंडारों के करीब 550 लोग ही हैं। जबकि अन्य सभी को प्रशासन ने सुरक्षित नीचे भेज दिया है।
एक बार तो बंद हो गए थे भंडारे, राहत कार्य चले
प्रधान विजय सिंगला ने बताया कि शाम करीब छह बजे सैलाब आया था, उस दौरान सभी भंडारे बंद हो गए थे और सभी राहत कार्यों में जुट गए। टेंटों में भी पानी घुस आया था, रास्तों में भी कीचड़ रहा। माइक से सभी सेवादार यात्रियों को गाइड करते रहे। करनाल के 45 सेवादारों की टीम में से वर्तमान में 35 गुफा के पास हैं। जबकि 10 सेवादार नीचे बालटाल में बने स्टोर पर हैं। वहां से जरूरत पड़ने पर घोड़ों से सामान टेंट तक लाया जाता है।
दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के भंडारों को हुआ नुकसान
शाम को दो बार हुई बरसात और सैलाब से चार भंडारों को नुकसान हुआ है। इनमें अपर कैंप पर लगे मानसा पंजाब, दिल्ली शाहदरा व एक अन्य और गंगानगर राजस्थान के भंडारों को नुकसान हुआ है। प्रधान विजय सिंगला ने बताया कि गनीमत रही कि रात को बरसात नहीं हुई और सभी आग जलाकर सेंकते रहे। बाबा सबको सुरक्षित रखेंगे। 30 जून से 11 अगस्त तक भंडारा लगना है। अभी केवल नौ ही दिन हुए हैं।
15 जून को शोभायात्रा के साथ हुए थे रवाना
- पवित्र गुफा पर 27वां भंडारा लगाने कर्ण नगरी से पहला जत्था सामान और टेंट लेकर 14 जून को रवाना हुआ।
- 15 जून को सभी सेवादार दूसरे जत्थे में गए थे, इससे पहले करनाल में शोभायात्रा भी निकाली गई थी।
- जत्था 20 जून को गुफा के पास पहुंचा था। 22 तक बर्फबारी रही और 23 जून को भंडारे के लिए शेड तैयार किया था।