संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में टीबी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 से अब तक जिले में 4218 मरीजों की पहचान हुई है। इनमें से 3966 मरीज जिले के निवासी हैं। वहीं, पिछले साल भी जिले में 5100 टीबी मरीज सामने आए थे, जिनमें 4598 मरीज करनाल के स्थाई निवासी थे। टीबी नोडल अधिकारी व उप सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी कपूर ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है और अगर मरीज समय पर इलाज न ले तो यह कई लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसलिए सभी मरीजों की जांच और इलाज पर ध्यान देना आवश्यक है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष सितंबर के बाद से 5400 टीबी मरीजों की पहचान का लक्ष्य बढ़ा दिया है। विभाग ने बताया कि इस वर्ष सामने आए मरीजों में से 2730 मरीजों को 614 निक्षय मित्रों ने पोषण किट और इलाज में सहयोग दिया है। एमडीआर (बिगड़ी) मरीजों की विशेष निगरानी की जा रही है। 2024 में कुल 5100 मरीज, जिनमें से 4598 करनाल जिले के और 4047 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हुए। वहीं, 2025 जनवरी–अब तक में कुल 4218 मरीज मिले, जिनमें 3966 करनाल जिले के थे बाकी बाहर से हैं और इनमें से 900 मरीजों का इलाज पूरा हुआ। वहीं, पिछले कुछ वर्षों में टीबी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है। जिनमे कि 2019 में 854, 2020 में 4312, 2021 में 4274, 2022 में 4507, 2023 में 5132, 2024 में 5100 टीबी मरीज मिले हैं। कई जो मरीज जिले के स्थाई निवासी नहीं हैं वें करनाल में बड़ी संख्या में फैक्ट्रियों, निर्माण स्थलों और खेतों में काम करते हैं। वहीं, अस्वच्छ वातावरण और पोषण की कमी के कारण टीबी का शिकार हो जाते हैं।
किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण पाए जाने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच और इलाज करवाएं। सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी का इलाज नि:शुल्क है। भारत सरकार ने टीबी को नोटिफाइबल डिजीज घोषित किया है। निक्षय पोषण योजना के तहत मरीज को 1000 रुपये प्रति माह पोषण सहायता दी जाती है। देखभाल करने वाले डॉक्टर, आशा वर्कर और सूचना देने वाले व्यक्ति को भी 500 रुपये प्रति मरीज दिया जाता है। जिले को टीबी मुक्त करने के लिए विभाग की टीमें घर-घर जाकर स्क्रीनिंग कर रही हैं।
डॉ. सिम्मी कपूर, टीबी नोडल अधिकारी