कुछ दिन और मौसम रहा मेहरबान तो भर जाएंगे देश के खाद्यान भंडार
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
अगर मौसम कुछ दिन और मेहरबान रहा तो इस बार गेहूं की बंपर फसल होगी और देश के खाद्यान भंडार भर जाएंगे। फिलहाल मौसम गेहूं की फसल के अनुकूल चल रहा है। मौसम का असर ये है कि गेहूं के बड़े उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में अब तक पीला रतुआ बीमारी का एक भी केस सामने नहीं आया है। गेहूं अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल के वैज्ञानिकों का मानना है कि अनुकूल तापमान ने काफी हद तक गेहूं की फसल में पीला रतुआ की आशंका को कम कर दिया है। अगर कुछ दिनों के लिए जलवायु की स्थिति एक समान रहती है तो इस बार देश में पिछले साल के 98.37 लाख मिलियन टन की बजाए 100 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हो सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि वे तापमान के उतार-चढ़ाव को लेकर अलर्ट रहें और लगातार फसल पर निगरानी बनाए रखें। आशंका है कि ठंड से सब्जियों और सरसों के फसलों को प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए किसानों को चाहिए वे फसलों को धान के अवशेषों ढक लें और उन्हें सर्दी से बचाएं।
हर साल पीला रतुआ का रहता है प्रकोप
बता दें कि हर साल गेहूं में पीला रतुआ की बीमारी आती है, जो फसल को काफी बर्बाद कर देती है। यह बीमारी गेहूं की बालियों को पूरी तरह से खत्म कर देती है और किसान के हाथ एक दाना भी नहीं आता। इस बीमारी से बचाने के लिए गेहूं अनुसंधान संस्थान करनाल की टीमें अलग-अलग राज्यों में गेहूं की फसलों का निरीक्षण कर रही हैं। टीम अब तक पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व यूपी समेत अन्य प्रदेशों का निरीक्षण कर चुकी है। अच्छी बात ये है कि अब तक किसी भी प्रदेश में पीला रतुआ का कोई केस सामने नहीं आया है। इसके पीछे वैज्ञानिक मानते हैं ये सब मौसम की मेहरबानी है। पिछले कई दिनों से मौसम में अच्छी ठंडक है, जो गेहूं के लिए रामबाण के समान है। इससे गेहूं का फुटाव अच्छा होगा और पीला रतुआ बीमारी पनपने की आशंका भी कम होगी। इसका नतीजा है कि इस बार पीला रतुआ बीमारी नहीं है। गौरतलब है कि हरियाणा में इस बार 25.80 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई की गई है, पिछली बार यह संख्या 21.90 लाख हेक्टेयर के करीब थी। वहीं देश की बात करें तो इस बार 283.46 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई की गई है। साल 2016-17 में यह आंकड़ा 297.67 लाख हेक्टेयर था। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस बार बंपर फसल होगी।
पीला रंग मतलब रतुआ नहीं, पुष्टी के बाद ही करें छिड़काव
जनवरी और फरवरी में गेहूं की फसल में लगने वाले पीला रतुआ (येलोरस्ट) रोग आने की आशंका रहती है। तापमान में वृद्धि के साथ-साथ गेहूं को पीला रतुआ रोग लग जाता है। गेहूं अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि गेहूं के पत्तों पर पीले रंग का मतलब पीला रतुआ नहीं है। बीमारी की पुष्टि तभी हो सकती है, जब पीला रंग हल्दी की तरह उंगलियों पर या एक सफेद कपड़े पर संक्रमित पत्तियों को रगड़ने के बाद दिखाई देता है। यदि किसानों को पीले रतुआ का कोई लक्षण मिल जाए, तो उसे किसी कृषि संस्थान या कृषि विज्ञान केंद्र या गेहूं अनुसंधान संस्थानों में चेक कराएं, पुष्टि होने के बाद ही दवा का छिड़काव करें, अन्यथा नहीं। यदि रतुआ रोग के लक्षण दिखाई दे तो प्रोपिकोनजोल 25 ईसी का छिड़काव लाभदायक रहेगा।
भंडार भरने में हरियाणा का अहम रोल
देश के खाद्यान भंडार भरने में हरियाणा का अहम रोल है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल कुल गेहूं उत्पादन में 94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 283 लाख टन के साथ यूपी पहले, 35 लाख हेक्टेयर में 165 लाख टन पंजाब, 59 लाख हेक्टेयर में 156 लाख टन मध्यप्रदेश, 26 लाख हेक्टेयर में 115 लाख टन हरियाणा, राजस्थान 30 लाख हेेक्टेयर में 100 लाख टन, बिहार में 21 लाख हेक्टेयर में 52 लाख टन, गुजरात में नौ लाख हेक्टेयर में 26 लाख टन गेहूं उत्पादन हुआ है। प्रति हेक्टेयर 44 क्विंटल गेहूं उत्पादन कर हरियाणा पंजाब (47 क्विंटल) के बाद दूसरे स्थान पर है। पिछले साल हरियाणा में 114.89 लाख टन के करीब गेहूं उत्पादन हुआ है, जो साल 2014-15 के मुकाबले करीब 11 लाख टन अधिक है। अब तक देश में 51.82 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के साथ गेहूं उत्पादन में राष्ट्रीय रिकार्ड हरियाणा के नाम है।
अच्छे फुटाव को लेकर जनवरी में गेहूं के लिए अधिकतम 20 और न्यूनतम तीन से चार डिग्री तक का तापमान चाहिए। पिछले 10 दिन से यही स्थिति चल रही है। इस बार गेहूं की फसल के लिए मौसम अनुकूल है, इसी कारण अब तक पीला रतुआ का कोई केस सामने नहीं आया है। लेकिन अचानक तापमान बढ़ा और बारिश हुई तो किसानों को सतर्क रहना होगा और फसल पर लगातार निगरानी करनी होगी। हमें उम्मीद है कि इस बार 98.37 लाख मिलियन टन की बजाए 100 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हो सकता है।
उधर, ठंड से सब्जियों और सरसों के फसलों को प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए किसानों को चाहिए वे फसलों को धान के अवशेषों ढक लें और उसे सर्दी से बचाएं। -डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, निदेशक, डीडब्ल्यूआर।
फिलहाल मौसम में ठंडक रहेगी। कोहरे और ठंड का दौर चलने की संभावना है। पिछले दस दिन से अधिकतम तापमान 20 और न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस से नीचे ही चल रहा है, जो गेहूं के लिए अच्छा है। हालात देखकर संभावना है कि न्यूनतम तापमान और नीचे जाएगा, जिससे ठंड बढ़ेगी। साथ ही शीतलहर भी चल सकती है और आगामी दिनों में पाला पड़ने की संभावना बन रही है। -डॉ. देवेंद्र बुंदेला, मौसम विशेषज्ञ।