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आईटीआई चौक पर हुए बवाल को शांत करने में जुटा शासन- प्रशासन

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। छात्र निकित की सड़क हादसे में मौत के अगले दिन शुक्रवार को आईटीआई चौक पर हुए पथराव और फायरिंग के मामले को सुलझाने में स्थानीय से लेकर प्रदेश स्तरीय अ धिकारी जुट गए हैं। अगले महीने होने वाले लोकसभा चुनाव में यह बवाल मुद्दा न बने, इसलिए छात्र, आईटीआई के प्रिंसिपल और इंस्ट्रक्टरों से अलग-अलग वार्ता की जा रही है। जिसमें उन्हें समझाने की कोशिश की गई है कि लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता के कारण इस घटना के आरोपी एसएचओ और पुलिस अफसरों का फिलहाल तबादला संभव नहीं हैं। चुनाव आयोग भी आसानी से इनके तबादले की अनुमति नहीं देगा। चुनाव के खत्म होते ही इस घटना से जुड़े अफसरों का तबादला कर दिया जाएगा। घटना में सीधे तौर पर जो भी दोषी थे उनको लाइन हाजिर कर दिया गया है।
सूत्रों की मानें तो आईटीआई के प्रिंसिपल और इंस्ट्रक्टरों को साधने के लिए प्रदेश मुख्यालय से अपर मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह को लगाया गया है। उन्होंने जांच में एसडीएम करनाल के साथ-साथ पंचकूला से अपर निदेशक तथा अन्य अधिकारी को कमेटी में शामिल करा दिया है। इन दोनों अफसरों की वजह से प्रिंसिपल इस जांच का विरोध नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि उनका विरोध पुलिस की ओर से की गई अभद्रता को लेकर जारी है।
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छात्रों का हंगामा शांत कराने के उद्देश्य से सोमवार और मंगलवार को आईटीआई में अवकाश घोषित कर दिया गया है। इन दो दिनों में प्रशासन को इस बवाल के काफी हद तक शांत होने की उम्मीद है। हालांकि अभी तक इंस्ट्रक्टर की यूनियन के तेवर तल्ख हैं और वह पुलिस तथा प्रशासनिक स्तर से की जा रही इन दोनों जांच से सहमत नहीं हैं। प्रदेश स्तरीय अधिकारियों की टीम इंस्ट्रक्टरों की यूनियन से संपर्क में हैं। ये यूनियन प्रदेश स्तरीय हैं इसलिए उनको भी साधने के लिए प्रदेश स्तरीय अफसरों को लगाया गया है।
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शुक्रवार को घटना वाले दिन चंडीगढ़ में विरोधी नेताओं के बयान के बाद पुलिस ने देर रात में ही गिरफ्तार किए गए 103 छात्र-छात्राओं को अदालत में पेश करके उनकी जमानत करा दी थी। अगले दिन सीएम मनोहर लाल के करनाल आने पर उनके सामने यह मामला उठा था। उन से कुछ लोग पन्ना प्रमुखों की बैठक के दौरान मिले तो कुछ दूसरे स्थान पर आयोजित धार्मिक आयोजन के समय मिले थे। चुनाव के कारण सीएम इस प्रकरण में पहले से ही गंभीर थे। उन्हीं की गंभीरता का नतीजा रहा कि एक दिन पहले रात में ही सभी छात्रों की जमानत करा दी गई थी। लोगों के मिलने के बाद उन्होंने इस मामले को और ज्यादा गंभीरता से लिया। उसी के बाद प्रदेश तथा स्थानीय पुलिस- प्रशासनिक अफसरों ने कानूनी प्रक्रिया तो कुछ आपसी वार्ता कराके इस मामले को हर स्तर से सुलझाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
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