निगम से टेंपरेरी एडवांस के नाम पर लिए 10.18 करोड़ रुपये, बिल दिया न ब्यौरा
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
वित्तीय मामलों में लापरवाही और गड़बड़ी को लेकर नगर निगम के एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला निगम से टेंपरेरी एडवांस के नाम पर लिए गए 10.18 करोड़ रुपये का है। दरअसल, निगम से प्रदेश सरकार के कई विभागों ने 10.11 करोड़ रुपये और निगम के कर्मचारियों-अधिकारियों ने सात लाख रुपये टेंपरेरी एडवांस के नाम पर लिये गए।
अहम बात यह है कि टेंपरेरी एडवांस राशि एक महीने में ही खर्च करनी होती है और इसके बाद खर्च का ब्यौरा देते हुए यूटिलाइनजेशन सर्टिफिकेट (यूसी) देने होते हैं। लेकिन नगर निगम में ऐसा कुछ नहीं हुआ। जिसके पास जितना पैसा आया, उसने कहां पर कैसे खर्च किया निगम के पास इसका कोई हिसाब किताब नहीं है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि डायरेक्टर लोकल आडिट हरियाणा ने रिपोर्ट में यहां तक खुलासा किया है कि इतने वर्षों के बाद भी खर्च का हिसाब नहीं देना या पैसे वापस जमा नहीं कराना गबन की ओर इशारा करता है।
वर्ष 2015-16 की आडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि निगम ने अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को टेंपरेरी एडवांस के तौर पर 7 लाख 38 हजार रुपये की राशि जारी की हुई है। यह राशि 1990 से लेकर 2015 तक वर्षों में जारी की गई। चौंकाने वाली बात यह है कि निगम के अधिकारी कर्मचारियों को टेंपरेरी एडवांस तो देते रहे, लेकिन न तो कभी उनसे खर्च का बिल मांगा और न ही पैसे वापस मांगे। इतने वर्षों से किसी भी कर्मचारी व अधिकारी टेंपरेरी एडवांस का कोई हिसाब किताब नगर निगम को नहीं दिया।
अब आलम यह है कि टेंपरेरी एडवांस लेने वाले कुछ कर्मचारी तो रिटायर्ड हो चुके हैं और कुछ के यहां से तबादले हो चुके हैं। हालांकि, नियमानुसार यह राशि केवल माह में खर्च करके वापस उसके बिल नगर निगम में जमा कराने होते हैं, लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं किया गया। जानकार बताते हैं कि यह एडवांस तुरंत की जरूरतें पूरी करने के लिए दिया जाता है। अधिकारी व कर्मचारी अपनी जरूरतें पूरी करके चले गए, अब निगम के अधिकारी उनका इंतजार कर रहे हैं।
आदेश के बाद भी नहीं रोका वेतन
मामले को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा सरकार के विभागीय सचिव ने 2001 में पत्र जारी करके लिखा था कि जो लोग टेंपरेरी एडवांस का हिसाब किताब नहीं दे रहे हैं, उनका वेतन ही रोक लिया जाए। बावजूद इसके ऐसा कोई एक्शन नहीं लिया गया। सचिव ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इतने लंबे समय तक हिसाब नहीं देना टेंपरेरी गबन की तरफ इशारा करता है।
दर्जनभर विभागों ने लिया करोड़ों का एडवांस
इसी प्रकार 10 करोड़ 11 लाख रुपये दूसरे विभागों ने निगम से ले रखे हैं। इन विभागों ने भी अभी तक खर्च का ब्यौरा नहीं दिया है और न ही इस्तेमाल का सर्टिफिकेट दिया है, जो प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल से चेक होने के बाद आता है। इनमें सबसे ज्यादा पैसा पीडब्ल्यूडी और पब्लिक हेल्थ के पास है। इनके अलावा 83 बार निगम ने ऐसे विभागों को टेंपरेरी एडवांस दिया है। इनमें थर्मल प्लांट पानीपत, नार्दन रेलवे को, हरेडा, रिन्युवेबल एनर्जी, एनआईटी कुरुक्षेत्र, ग्राम पंचायत शेखपुरा, आरटीए अंबाला, इंडियन ऑयल कारपोरेशन, पब्लिक हेल्थ शामिल हैं। सॉलिड वेस्ट प्रोजेक्ट को चलाने के लिए एनबीसीसी कंपनी को दो-दो बार दो-दो करोड़ रुपये दे गए हैं। साल 1990 के बाद से आज तक इन्होंने इस टेंपरेरी एडवांस का हिसाब नहीं दिया है।
लापरवाही के ये मामले आ चुके हैं सामने
वर्ष 2015-16 की आडिट रिपोर्ट नगर निगम अधिकारियों की गड़बड़ियों का पुलिंदा है। अब तक वित्तीय मामलों में लापरवाही के कई मामले सामने आ चुके हैं। इनमें सरकार से एक करोड़ रुपये का लोन लेने के बाद वापस नहीं करने पर दो करोड़ रुपये ब्याज लगनेे का मामला है। इसके साथ ही बिना अथॉरिटी और बिना चेक ही निगम के खाते से सर्विस टैक्स विभाग को 28 लाख रुपये जारी कर दिये गए। इसके अलावा, निगम द्वारा नियमों को ताक पर रखकर निजी बैंकों में 56 खाते खुलवा लिये गए। इसके अलावा, कंट्रक्शन कंपनी से 6.89 लाख रुपये लेने थे, लेकिन लापरवाही के कारण निगम को ही 1.75 लाख रुपये और देने पड़ गए थे।
नगर निगम के अधिकारी मनमर्जी कर रहे हैं। जो मन में आता है वही करते हैं। लोगों के टैक्स से एकत्रित किये गए पैसे का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। दुखद बात यह है कि कोई इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। इन मामलों को दबने नहीं दिया जाएगा और सदन में उठाएंगे। कभी तीन करोड़ तो कभी सात करोड़ के मामले सामने आ रहे हैं। जिन अधिकारियों के कारण ऐसा हुआ है, उनके खिलाफ सख्त एक्शन लेना चाहिए। -राकेश भाग सिंह, पार्षद, वार्ड नंबर एक
ये नगर निगम और इससे पहले परिषद के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही है। ऐसे अधिकारी किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाने चाहिए, पर परेशानी यह है कि आज तक निगम की ओर से ऐसे अधिकारियों की पहचान तक नहीं कराई गई। नगर निगम के पैसे का दुरुपयोग कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा। निगम अधिकारियों के रोजाना नये खुलासे हो रहे हैं, इससे शहर की छवि भी खराब बन रही है। इन सभी मामलों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और कार्रवाई की जाए। इस मामले को हाउस की बैठक में रखा जाएगा। -बलविंद्र सिंह, पार्षद, वार्ड नंबर-2
ये मामला मेरे से पहले का है। इनको चेक कराया जाएगा, क्योंकि मामला वित्तीय मामलों से जुड़ा है। इसलिए फाइल देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। हम कोशिश करेंगे कि इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जा सके। - धीरज कुमार, ईओ