अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। तीन साल से कम उम्र के बच्चे को दाखिला देने वाले निजी व प्लेवे स्कूल संचालकों की अब खैर नहीं है। शिक्षा विभाग की ओर से सख्त निर्देश जारी होने पर डीईईओ ने बीईईओ को निर्देश दे दिए हैं कि वह जांच करें कि किस निजी व प्लेवे स्कूल में तीन साल से कम उम्र के बच्चे को दाखिला दिया हुआ है।
बता दें शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हुए हैं कि तीन साल से कम उम्र के बच्चों को दाखिला नहीं दिया जाएगा। यदि कोई स्कूल दाखिल देता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही पहली कक्षा से पहले सिर्फ दो की क्लासें पढ़ाई जाएं, छोटे बच्चों पर पढ़ाई को लेकर कोई दबाव भी डाला न जाए।
बच्चों की उम्र से नहीं फीस से मतलब है निजी व प्लेवे स्कूल संचालकों को
जिले में हर वर्ष छह से सात प्लेवे नए स्कूल खुलते हैं। इन स्कूलों में मोटी कमाई के लिए दो साल के बच्चे को भी दाखिला दे दिया जाता। जो उम्र बच्चे की घर में खेलने की होती है उस उम्र में ही निजी और प्लेवे स्कूल में उन्हें पढ़ाया जाता है। इन स्कूल संचालकों को बच्चों की उम्र से कोई मतलब नहीं होता, सिर्फ बच्चों के अभिभावकों द्वारा दी गई फीस से मतलब होता है।
अभिभावक भी रखें ध्यान, पड़ोसियों की ना करें रीस
घर में जब बच्चा डेढ़ साल से ज्यादा का हो जाता है तो घर में बच्चों को किस स्कूल में भेजना है इस बात पर चर्चा होने लगती है दो साल की उम्र होते ही अभिभावक अपने बच्चे को गूगल बनाने के चक्कर में उस स्कूल भेज देते हैं व प्राइवेट स्कूल जमकर पैसे वसूलते हैं। यह सब केवल प्रतिस्पर्धा के कारण हो रहा है। अभिभावक अपने पड़ोसी के बच्चे को देखते हैं कि उन्होंने दो साल की उम्र में ही अपने बच्चे को स्कूल भेजना शुरू कर दिया है।
पहले नर्सरी के बाद आती थी सीधी पहली क्लास, अब लगते हैं 4 साल
पहले नर्सरी क्लास के बाद सीधा पहली क्लास में दाखिला होता था, लेकिन धीरे-धीरे नर्सरी के बाद एलकेजी, यूकेजी क्लास सेलेबस में जोड़ी गई। अब नर्सरी से पहले भी प्री नर्सरी को जोड़ दिया गया जिससे बच्चे को पहली क्लास तक पहुंचने में ही 4 साल लग जाते हैं। इस कारण मां-बाप छोटी उम्र में ही बच्चों को स्कूल भेजने लगते हैं। इससे बच्चों की शारीरिक ग्रोथ पर असर पड़ता है व प्राइवेट स्कूलों के धंधे के कारण मां बाप का पैसा भी खराब होता है।
शिकायत मिलने पर तुरंत की जाएगी कार्रवाई : डीईईओ
विभाग की ओर से निर्देश मिले हैं कि निजी व प्लेवे स्कूल में तीन साल से कम उम्र के बच्चे को दाखिला न दिया जाए, यदि किसी ने दाखिला दिया है तो उसकी जांच करें। इसके लिए सभी बीईईओ को निर्देश जारी कर दिए हैं। यदि किसी स्कूल के खिलाफ शिकायत मिलती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।-राजपाल, डीईईओ, करनाल।