अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। 650 करोड़ रुपये की लागत से बने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों की लापरवाही रुकने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को मेडिकल कॉलेज में फिर से लापरवाही के दो मामले सामने आए। पहले मामले में डिलीवरी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप हैं। इस दौरान बच्चे के पिता का आरोप है कि उनका बच्चा मर चुका है, जान बुझकर उसे न्यूनेटल इनटेंसिव केयर यूनिट (निक्कू) में रखा गया है, जबकि चिकित्सक बच्चे को जीवित करार दे रहे हैं। वहीं, दूसरे मामले में प्रसूति विभाग में ही एक गर्भवती महिला बेड से गिर गई। दोनों ही मामलों में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन चुप्पी साधे हुए है और कुछ भी जानकारी देने से बच रहा है। बड़ागांव निवासी सतपाल ने बताया कि दो दिन पहले उसने अपनी पत्नी अनीता को मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया था। सतपाल का आरोप है कि उन्होंने डॉक्टरों से कई बार गुहार लगाई कि ऑपरेशन कर दो, लेकिन डॉक्टर इसके लिए तैयार नहीं हुए और सामान्य डिलीवरी कराई गई। आरोप है कि डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत हो गई। जैसे ही परिजनों को इस बात की भनक लगी तो उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया और आनन-फानन में पुलिस को बुलाना पड़ा। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने फजीहत से बचने के लिए बच्चे को रेफर करने की कोशिश की। विरोध को देखते हुए बच्चे को निक्कू यूनिट में रखा गया और दावा किया गया कि बच्चे की सांस चल रही है। हालांकि, परिजन दावा कर रहे हैं कि खुद स्टाफ ने ही बताया था कि बच्चा मृत पैदा हुआ है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर दावा कर रहे हैं कि बच्चा जीवित है। सतपाल ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों के साथ सही व्यवहार नहीं हो रहा है और न ही सही प्रकार से इलाज मिल रहा है। वहीं, एक अन्य परिजन ने दावा कि लेबर रूप में एक गर्भवती महिला बेड से गिर गई, क्योंकि एक एक बेड पर दो-दो महिलाओं को लेटाया गया है। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है। हालांकि, गिरने से उसके बच्चे पर इसका असर पड़ा है।
फोन पर बिजी रहते हैं नर्स और डाक्टर
मरीजों के परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के गायनी वार्ड में स्टाफ नर्स गर्भवती महिलाओं की देखरेख करने की बजाए फोन में लगी रहती है। गायनी वार्ड में एक ही महिला को जाने दिया जाता है वह भी एक या दो मिनट के लिए। वार्ड में गर्भवती महिलाएं दर्द से तड़पती रहती हैं उनकी वहां कोई नहीं सुनता सभी मोबाइल में व्हटउप पर लगे रहते हैं।
चार बेटियों के बाद हुआ लड़का
सतपाल ने बताया कि सोमवार को वह अपनी पत्नी अनीता को साढ़े 11 बजे मेडिकल कॉलेज में लेकर आया था। दो दिन तक उसकी पत्नी दर्द से तड़पती रही, उन्होंने डॉक्टर को कहा कि वह ऑपरेशन कर डिलीवरी कर दें, लेकिन डॉक्टर बोले की डिलीवरी नार्मल हो जाएगी। बुधवार दोपहर को उसकी पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया लेकिन वह मरा हुआ था। डॉक्टर ने कहा कि बच्चे को चंडीगढ़ या रोहतक पीजीआई ले जाओ। उसका बच्चा मरा हुआ है डॉक्टरों ने उसे निक्कू में रखा हुआ है और कह रहें हैं वो जीवित है।
इससे पहले भी हो चुकी है नवजात बच्चों की मौत
मेडिकल कॉलेज के गायनी वार्ड में डॉक्टरों की लापरवाही के मामले सबसे ज्यादा आ रहे हैं। डिलीवरी के दौरान नवजात की मौत का ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई नवजात की मौत हो चुकी है। उन मामलों में भी परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगाए थे, लेकिन उन मामलों में कोई जांच नहीं हुई।
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बड़ागांव निवासी अनीता का बच्चा जिंदा है, जब उसने जन्म लिया उसे सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। इसलिए उसके पिता सतपाल को कहा था कि वह बच्चे को पीजीआई में लेकर चला जाए, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर नहीं हैं, लेकिन वह लेकर नहीं गया। अभी बच्चा निक्कू में है और सांस ले रहा है। दूसरा गर्भवती महिला बेड पर सोती हुई गिरी थी, इस बारे में आज पता चला है।
-मुनीष पुरथी, डीएमएस, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज, करनाल।