मैं किसान का बेटा, समझता हूं किसान का दर्द : सीएम
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और किसान का दर्द अच्छी तरह से समझता हूं। मुझे पता है कि किसान खेत में कितनी मेहनत करता है और उसके हिस्से पैसे कितने आ पाते हैं। इसलिए किसानों की परेशानी को समझते हुए ही हम जोखिम फ्री खेती को लेकर योजनाएं शुरू कर रहे हैं। सरकार चाहती है कि प्रति एकड़ से किसान साल में एक लाख रुपये कमा सके। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को गांव गांगर में भावांतर भरपाई योजना की शुरुआत की। इस योजना में टमाटर, प्याज, आलू और गोभी की फसल शामिल हैं। योजना के लिए सरकार द्वारा एक अलग फंड भी तैयार किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भावांतर भरपाई ई-पोर्टल और क्रॉप कलस्टर डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत टमाटर उत्पादक किसान का रजिस्ट्रेशन भी किया। मुख्यमंत्री ने किसानों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि भावांतर का मतलब भाव-अंतर है, अर्थात भाव के अंतर की भरपाई। उन्होंने कहा कि जिन चार फसलों की भरपाई की जाएगी उनमें टमाटर के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल, आलू के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल, गोभी और प्याज के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भरपाई करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस योजना के तहत इन मूल्य से कम मूल्य होने पर आने वाले अंतर की भरपाई करेगी। सरकार किसानों के उत्पाद की सुरक्षा के लिए कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधा भी देने पर विचार कर रही है। इसी प्रकार खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां भी राज्य में स्थापित की जा रही है।
ये है भावांतर योजना : धनखड़
भावांतर भरपाई योजना के बारे में कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने बताया कि किसान को अपनी फसल के पैदावार के समय में इसे भावांतर भरपाई वेबसाइट पर या हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के कार्यालय में जाकर पंजीकरण करवाना होगा, कि वह अपने खेत में यह फसल पैदा कर रहा है। इसकी पुष्टि के लिए सरकार द्वारा एक अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो इस बात की पुष्टि करेगा कि अमुक किसान के खेत में यह फसल उगाई गई है और उसकी पुष्टि होने के बाद विभाग द्वारा किसान के मोबाइल पर एसएमएस भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि भाव के लिए किसान को जे-फार्म भी कटवाना होगा, यदि भाव अधिक है तो भी उसे मंडी के अधिकारी से जे-फार्म चढ़वाना होगा अन्यथा किसान को अगले वर्ष पंजीकृत नहीं किया जाएगा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि हरियाणा बागवानी विश्वविद्यालय का विस्तार किया जा रहा है, जिसके लिए लगभग 500 करोड़ रुपये से ऊपर की राशि दी गई है। इसी प्रकार 36 करोड़ रुपये की लागत से 4 इंडो इजराइल उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए है और इसी तर्ज पर बागवानी केंद्र भी राज्य के प्रत्येक जिला में स्थापित किए जाएंगे।
रोहतक की मंडी में 108 रुपये की सब्जी बेची
बचपन की याद साझा करते हुए सीएम मनोहर लाल ने बताया कि जब वे आठवीं कक्षा में पढ़ते थे तो उनके पिता किसान थे। पिता ने जब उनको कहा कि इस खेत की सारी फसल को आप बेच कर आएंगे तो जो भी फसल के पैसे मिलेंगे वो आपके होंगे। ये बात सुनकर उन्हें खुशी मिली और कहा कि ठीक हैं, मैं यह कार्य कर लूंगा।
पिता ने खेत में टिंडे की सब्जी उगा रखी थी और वे एक महीने तक इस सब्जी को साइकिल पर ले जाकर रोहतक की मंडी में बेचते थे, जिससे उन्हें कुल 108 रुपये की कमाई हुई थी। तब उनके पिता ने उनसे कहा कि यह सभी पैसे आपके हैं, आप क्या लेना चाहते हों, इस पर उन्होंने कहा था कि वे एक हाथ घड़ी लेना चाहते हैं, जो उस समय 105 रुपये की आई और शेष पैसों में और पैसे मिलाकर एक ऑक्सफोर्ड की डिक्शनरी ली। इसलिए मैं अच्छी तरह से समझता हूं किसान को कड़ी मेहनत के बाद भी कम पैसे बचते हैं। इस अंतर को दूर करने के लिए सरकार काम कर रही है।