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ई-ट्रेडिंग के विरोध में आढ़ती, आज बंद रहेंगी जिलेभर की अनाजमंडियां, मार्केट कमेटी चेयरमैन के बेटे करेंगे आंदोलन की अगुवाई

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ई-ट्रेडिंग के विरोध में आढ़ती, आज बंद रहेंगी जिले भर की अनाज मंडियां, मार्केट कमेटी चेयरमैन के बेटे करेंगे आंदोलन की अगुवाई
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। धान का सीजन आने से पहले ही एक बार फिर से सीएम सिटी के आढ़तियों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। ई-ट्रेडिंग के विरोध में जिलेभर की आढ़ती एसोसिएशनों ने सरकार के ई-ट्रेडिंग के फैसले का विरोध करते हुए चार अगस्त को सभी अनाज मंडियां बंद रखने का ऐलान किया है। संघर्ष की रणनीति तय करने के लिए जिले की सभी मंडियों के प्रधान व पदाधिकारी करनाल अनाज मंडी में एकत्रित हुए। सरकार पर दबाव बनाने और ई-ट्रेडिंग के निर्णय को वापस लेने के लिए एक कमेटी का गठन किया है, जिसका जिला प्रधान करनाल अनाज मंडी के प्रधान रजनीश चौधरी को बनाया गया। रजनीश चौधरी के नाम का अनुमोदन घरौंडा अनाजमंडी प्रधान सुशील गर्ग व तरावड़ी मंडी प्रधान शीशपाल ने किया। सभी प्रधानों ने इसे स्वीकार करते हुए रजनीश चौधरी को प्रधान चुना।
खास बात यह है कि रजनीश चौधरी हाल ही में मार्केट कमेटी के चेयरमैन बनाए गए रामकिशन चौधरी के बेटे हैं, जो सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। बता दें कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस नियुक्ति पर काफी विरोध भी जताया था, हालांकि बाद में भाजपा नेताओं ने मामले को शांत किया था और दावा किया था कि रामकिशन चौधरी काफी समय से भाजपा में हैं। अब मामला दिलचस्प हो गया है कि सरकार की तरफ से पिता खड़े हैं और बेटा आढ़तियों की तरफ से।
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बता दें कि ई ट्रेडिंग के तहत सरकार द्वारा किसानों की फसलों का भुगतान सीधे बैंक खातों के माध्यम से किया जाएगा। आढ़तियों का कहना है कि ई-ट्रेडिंग से आढ़तियों द्वारा जमीदारों को दी गई एडवांस पेमेंट का भुगतान अधर में पड़ जाएगा। व्यापारियों ने कहा कि किसान भी ई-ट्रेडिंग के विरोध में है और आढ़तियों के साथ खड़ा है। पिछले लगभग 50 वर्षों से भाईचारा कायम है और आपसी लेनदेन का विश्वास बना हुआ है। सरकार इस भाईचारे को तोड़ना चाहती है। संघर्ष समिति के प्रधान रजनीश चौधरी का कहना है कि ई ट्रेडिंग अव्यवहारिक व तर्कहीन है। यह किसी भी प्रकार से आढ़ती व किसानों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि इस काले कानून के विरोध में चार अगस्त को जिले भर की अनाज मंडियां बंद रहेंगी। सभी जगह मंडी के प्रधान संबंधित मार्केट कमेटी सचिव को ज्ञापन सौंपेंगे। आढ़तियों ने साफ कहा है कि अगर ई ट्रेडिंग का फैसला वापस नहीं लिया गया तो पूरे हरियाणा में अनाज मंडियां बंद कर दी जाएंगी। आढ़ती अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इस अवसर पर महिंद्र गर्ग, विनय गोयल, बग्गा, राजेश अरोड़ा, राजेश गोयल, मनीष गर्ग, दीपक आनंद, जिले सिंह, गजे सिंह, जुंडला मंडी प्रधान राजकुमार, जसवंत, तरावड़ी मंडी प्रधान राधेश्याम, शीशपाल, निसिंग मंडी प्रधान राजकुमार, असंध मंडी प्रधान राकेश गर्ग, निगदू मंडी प्रधान ओमप्रकाश, इंद्री मंडी प्रधान रघुबीर सिंह, नीलोखेड़ी से प्रधान राजपाल व कुंजपुरा मंडी प्रधान भारत भूषण विरमानी सहित बड़ी संख्या में आढ़ती मौजूद रहे।
पिछले साल सरकार ने दिया था एक साल की मोहलत
पिछले सीजन में प्रदेश सरकार द्वारा ई-ट्रेडिंग की शुरुआत की गई थी। हालांकि, एक भी दाना ई ट्रेडिंग के माध्यम से नहीं खरीदा गया और न ही बिका। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री द्वारा करनाल की मंडी में इसकी शुरुआत की गई थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका। इसके विरोध में पिछले साल भी आढ़तियों ने जमकर विरोध जताया था। 23 सितंबर, 2016 को प्रदेशभर के आढ़तियों ने कुरुक्षेत्र में रैली करके सरकार को चेताया था। इस पर सरकार ने बैकफुट पर आते हुए एक साल की मोहलत दी थी, जो अब खत्म हो रही है। आढ़तियों ने धान खरीद के सीजन से पहले ही विरोध करना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि प्रदेशभर में 35 हजार आढ़ती हैं, जबकि हरियाणा में करीब 15 लाख किसान हैं।
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ई ट्रेडिंग अच्छी, लेकिन खामियां कई : मान
इस बारे में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रत्नमान ने कहा कि ई ट्रेडिंग प्रणाली अच्छी है, लेकिन इसके लिए किसानों को जागरूक किया जाए, ताकि यह सिस्टम किसानों की समझ में आ सके। लेकिन ई ट्रेडिंग के लिए सरकार के पास कर्मचारी नहीं हैं, पिछली बार केवल स्टाफ के नाम पर दो कर्मचारी थे। इसका अच्छा तरीका ये है कि पढ़े लिखे युवा किसानों को इस कार्य की जिम्मेदारी सौैंपी जाए, ताकि यह सिस्टम अच्छी तरह से लागू हो सके और बेरोजगारों को रोजगार भी मिल सके। अगर आढ़ती विरोध कर रहे हैं, इसके पीछे तर्क जाना जाए। क्योंकि ई ट्रेडिंग से यकीनन दो नंबर का कार्य बंद हो जाएगा, इससे किसानों को लाभ मिलेगा और गलत कार्य करने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा। हम इसका समर्थन करते हैं।
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