साहब जी, घर तोड़ना है तो तोड़ दो, लेकिन मेरी बेटी की किताबें तो निकालने देते, कल इसका पेपर है
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। साहब जी, मेरी बेटी की किताबें मलबे में मत मिलाओ, कल इसका पेपर है, मुझे इसकी किताबें निकालने दो। हमारी जिंदगी को अंधेरे में चली गई, कम से कम बच्चों की जिंदगी तो बनने दो। हम दोबारा किताब कहां से खरीदेंगे? कुछ तो रहम कर लो। ये शब्द रोते और बिलबिलाते हुए एक मां ने अपनी बेटी की किताबें बचाने के लिए अवैध निर्माण तोड़ने वाले प्रशासनिक अमले से की। लेकिन उसकी पुकार से जेसीबी चालक व अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा, आलम बेटी की किताबें चंद लम्हों में मलबे में दम गई। जैसे ही निर्माण गिरा तो बेटी और मां की आंखें छलक आई। सोमवार को एचएसआईआईडीसी की ओर से नई अनाज मंडी के पास बजीदा रोड पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई। प्रशासनिक अमले द्वारा करीब निर्माणों पर पीला पंजा चलाया गया। इन कार्रवाई को लेकर सिटी थाना प्रभारी राजबीर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात था, ताकि कोई व्यक्ति विरोध करते हुए किसी अप्रीय घटना को अंजाम न दे सके। यह कार्रवाई करीब एक घंटे तक चलेे। इसमें दो जेसीबी शामिल रही। इस दौरान अन्नपूर्णा ढाबे को भी तोड़ दिया गया। इस पर संचालक महिला गीता ने टीम का विरोध किया। हालांकि, उसका टीम के आगे उसका बस नहीं चल सका। जैसे-जैसे जेसीबी का पंजा उस ढाबे पर चल रहा था वैसे ही जोर-जोर से गीता उसका पति सोहन सिंह व बेटी कविता भी रो रही थी। गीता ने बताया कि उसकी बेटी कविता का कल छठी कक्षा का पेपर है। उसके किताबें मलबे में ही दब गई हे। उन्होंने प्रशासन से 22 मार्च तक का समय मांगा था, क्योंकि 22 मार्च को उसकी बेटी के पेपर खत्म हो जाते और वह खुद ही यहां से चले जाते, लेकिन प्रशासन ने उनकी एक भी नहीं सुनी।
उच्च न्यायालय के निर्देश पर की गई कार्रवाई
एचएसआईआईडीसी के कार्यकारी अभियंता राजबीर सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। अवैध रूप से बने दस ढाबे, व दुकानों को गिराया गया है। इस कार्रवाई से पहले विभाग की ओर से नोटिस भी दिया गया था और जेसीबी चलाने से पहले उनमें रहने वाले लोगों को सामान निकालने के लिए भी समय दिया गया था। सामान निकालने के बाद ही जेसीबी चलाई गई है। कुछ अवैध निर्माण और शेष हैं, उन्हें भी जल्द ही हटाया जाएगा।
बिना बताए ही घेर दी दीवारें
पांच साल से रह रहे विनोद ने बताया कि वह अपनी पत्नी गुड्डी, लड़की काजल, मिनाक्षी, दीपक, गौतम के साथ पीछे पांच साल से यहां रह रहा था। यहां पर वह वाहनों के टायरों में पंक्चर लगाने का काम करता था, लेकिन सोमवार दोपहर को अधिकारी आए और कहा कि घर से बाहर निकलो और दीवार जेसीबी से गिरा दी। उन्हें सामान निकालने का भी समय नहीं दिया। प्रशासन को कार्रवाई करने से पहले नोटिस तो देना था, ताकि वे अपने रहने के लिए दूसरा घर देख लेते। अब वह रात को कहां जाएं और कहां सोए।