पीड़ित पर समझौते का दबाव, आरोपियों को खुला छोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। असंध के बाजारों में सरेआम हुई गुंडागर्दी को लेकर पुलिस ने सत्ता के राजनीतिक लोगों के आगे सरेंडर कर दिया है। पिछले पांच दिन से जिले समेत प्रदेश के लोग कानून की पालना की आस कर रहे हैं, लेकिन पुलिस आरोपियों की तरफ एक कदम तक नहीं बढ़ा पा रही है। असंध पुलिस के हालात ये हैं कि दहशत फैलाने के आरोपी सरेआम खुले घूम रहे हैं, जबकि पीड़ित अपनी जान बचाता फिर रहा है। पुलिस ने पूरा जोर पीड़ित पर दबाव बनाने पर लगाया हुआ है और समझौते के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, पीड़ित का साफ कहना है कि उसे न्याय चाहिए और वह न्याय लेकर ही दम लेगा। गौरतलब है कि असंध में सरेआम युवकों ने डंडों व गंडासियों के दम पर बाजार बंद कराने की कोशिश थी, विरोध करने वाले दुकानदारों पर भी हमला किया गया था। इसके अलावा पत्रकारों को भी जानबुझकर निशाना बनाया गया और उसके कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और उनके मोबाइल व कैमरे तोड़ दिए गए। इसके विरोध में दो दिन तक असंध के बाजार बंद रहे थे और विधायक के खिलाफ लोगों ने जमकर गुस्सा निकाला था। आरोप है कि विधायक के समर्थकों ने ही शहर में गुंडागर्दी मचाई। हालांकि, हर बार विधायक इन आरोपों का खंडन करते रहे हैं। पीड़ित पत्रकार रजत राणा की शिकायत पर विधायक समेत 200 लोगों पर हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है, इसके अलावा, बकायाद वीडियो फुटेज और फोटो भी पुलिस दिए गए हैं, लेकिन वारदात के पांच दिन बीतने पर भी पुलिस इस मामले में कोई जांच नहीं कर रही है। राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने खुद के पैर रोक लिए हैं और अपराधियों को खुला छोड़ रखा है।
किस आधार पर दी एमएलए को क्लीनचिट
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस सबसे पहले अपराधी को पकड़ने के लिए दौड़ती है, लेकिन असंध इसके उल्ट हो रहा है। यहां बचाने के लिए ज्यादा काम हो रहा है। पहले बिना शिकायत के विधायक के खिलाफ गलत धाराओं में केस दर्ज किया और फिर आनन फानन में विधायक को डीएसपी ने क्लीनचिट भी थमा दी। सवाल यह है कि आखिर यह क्लीनचिट किस आधार पर थमाई गई है? क्या आरोपी पकड़े गए हैं, क्या आरोपियों ने आकर पुु लिस को बताया है कि विधायक का इसमें कोई कसूर नहीं है। डीएसपी ने बिना किसी जांच पड़ताल के ही विधायक को दबाव के चलते क्लीनचिट देने का दावा किया है। इस बारे में जब डीएसपी दलबीर सिंह से सवाल किया जाता है तो उनके पास एक ही जवाब होता है, जांच चल रही है। गिरफ्तारी कब होगी। क्यों नहीं अभी तक गिरफ्तारी हुई, इसका कोई जवाब नहीं है। उधर, विधायक पहले ही कह चुके हैं उनका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है।
सिरे नहीं चढ़े समझौते के प्रयास
इस मामले में अलग अलग लोग समझौते के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, हालांकि आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर समाज के लोगों ने चुप्पी साध रखी है। मंगलवार को शहर के एक पैलेस में सामाजिक लोगों की बैठक हुई। इसमें पूरे मामले को लेकर निंदा की गई, लेकिन पूरा फोकस मामले में समझौैते पर रहा। पीड़ित पक्ष पर चारों तरफ से समझौैते के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उधर, पीड़ित पक्ष आरोपियों की गिरफ्तारी पर अड़ गया है। पीड़ित रजत, जसबीर व मनोज का कहना है कि आरोपियों की साजिश उनकी हत्या करने की थी, इसलिए उन्हें हर हाल में न्याय चाहिए। अगर जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे इस मामले में सीएम से मिलेंगे और विधायक समेत पुलिस की पोल खोलेंगे।
इन सवालों का जवाब मांग रही जनता
-वारदात के पांच दिन बीतने के बाद भी एक आरोपी गिरफ्तारी क्यों नहीं?
-वीडियो और फोटोज में आरोपियों के चेहरे साफ हैं, बावजूद इसके किसी आरोपी की शिनाख्त क्यों नहीं गई?
-अगर वारदात से विधायक या उसके समर्थकों का कोई लेना देना नहीं है, तो फिर वे समझौते के लिए दबाव क्यों बना रहे हैं?
-पुलिस गिरफ्तारी के लिए किसके आदेश का इंतजार कर रही है?
-केस दर्ज करते ही पुलिस को इतनी जल्दी क्या हुई कि तुरंत विधायक को क्लीनचिट थमा दी?
-विधायक के बाद अब और किस किस को मिलेगी क्लीनचिट
-पहले वारदात करने के लिए पु लिस ने युवकों को खुला छोड़ा, अब वारदात के बाद भी, क्यों?