रोडवेज बसों को बिना परमिट रूल के जारी की समय सारिणी, प्राइवेट संचालकों ने जताया विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। परिवहन निगम के नई समय सारिणी जारी करने के पहले दिन ही प्राइवेट बस संचालक इसके विरोध में उतर आए हैं। प्राइवेट बस संचालकों का कहना है कि सोमवार को आरटीए सचिव और जीएम रोडवेज ने रोडवेज बसों को परमिट के हिसाब से ज्यादा समय सारिणी जारी कर दी है। जबकि उनकी बसों को कम रूट दिए गए हैं। प्राइवेट बस संचालकों का आरोप है कि आरटीए सचिव और जीएम ने इस बारे में हाईकोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना की है। इसके विरोध में सभी बस संचालक आटीए कार्यालय में इकट्ठे हुए। सभी संचालकों ने आरटीए और जीएम के खिलाफ रोष व्यक्त किया। निजी बस संचालकों ने अपनी आपत्ति अपर मुख्य सचिव परिवहन विभाग, उपायुक्त, आरटीए और जीएम करनाल को भेजी है। वहीं मामले को लेकर आज बस संचालक हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। समय सारिणी को लेकर असंध और शाहबाद रूट पर ज्यादा आपत्ति जताई जा रही है। बता दें कि कई बार विरोध होने के बाद सरकार ने जब तक नई पॉलिसी नहीं बनती, तब तक प्राइवेट बस संचालकों को रूट दे दिए थे। रूटों के बाद मामले में समय सारिणी को लेकर पेंच फंसा हुआ था। सोमवार को आरटीए सचिव ने परिवहन समितियों के संचालक और रोडवेज जीएम को समय सारिणी बनाने के लिए बुलाया था। बैठक में समय सारिणी का प्राइवेट बस संचालकों ने विरोध किया था। बाद में मामले को लेकर वह उपायुक्त के पास भी गए थे। लेकिन देर शाम को काफी जदोजहद के बाद आरटीए सचिव की ओर से प्राइवेट और रोडवेज बसों के रूट निर्धारित कर दिए थे। सोमवार को समय सारिणी का विरोध जताते हुए सहकारी समितियों के प्रदेशाध्यक्ष राजबीर मोकल ने बताया कि आरटीए सचिव और जीएम रोडवेज ने मिलीभक्त से प्राइवेट बसों को तो परमिट के हिसाब से रूट दिए हैं। जबकि रोडवेज की बसें परमिट से ज्यादा समय सारिणी पर दौड़ रही हैं। इससे प्राइवेट बसों को काफी नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार हर रोज कोई ना कोई रोडा अटकाकर प्राइवेट बसों को सड़कों से हटाना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जीएम और आरटीए सचिव रोडवेज कर्मचारी यूनियनों के दबाव में आकर उनके साथ ऐसा कर रहे है। रोष व्यक्त करने वालों में जयभगवान, सुरेश, मेवा राम, ओंकार मराठा, मलखान सिंह, शीशपाल, संजू मराठा जाणी, प्रदीप, सुभाष चंद, देवी दयाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
असंध रूट पर 24 की बजाए 60 टाइम पर चल रही रोडवेज बस
परिवहन समिति संचालकों ने आरोप लगाया कि रोडवेज के पास असंध रूट पर 8 परमिट है। इसके हिसाब से रोडवेज के 24 टाइम बनते हैं, जबकि रोडवेज की बसें 60 टाइमों पर चल रही है। प्रदेशाध्यक्ष राजबीर मोकल ने मांग की कि रोडवेज की बसों को भी उनकी बसों के बराबर टाइम दिया जाए। उन्होंने कहा कि हाइकोर्ट का आदेश है शकि परमिट के हिसाब से टाइमिंग देनी ै, जबकि रोडवेज की बसों ो परमिट को अनदेखा कर टाइमिंग दी गई है। वह इस मामले को आज हाइकोर्ट में लेकर जाएंगे।
समय सारिणी को लेकर रोडवेज और प्राइवेट बस संचालकों की बैठक बुलाई गई थी। दोनों को नियमानुसार रूट निार्धरित किये गए हैं और इसी प्रकार टाइम टेबल भी दिया गया है। हव सकता है किसी को मनपसंद के रूट नहीं मिले हैं, इसलिये वे विरोध कर रहे हैं। -प्रद्युमन सिंह, आरटीए सचिव। ---------