माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भले ही हरियाणा में धान की रोपाई इसी सप्ताह खत्म हुई हो, लेकिन पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से बासमती की प्रजाति 1509 धान की जोरदार आवक हरियाणा की सीमावर्ती अनाज मंडियों में शुरू हो चुकी है। खास बात ये है कि जितना 1509 धान पिछले साल आया था, उससे करीब दो गुना धान पिछले 28 दिनों में ही करनाल की अनाज मंडी में पहुंच चुका है। किसानों की बल्ले-बल्ले हो रही है, क्योंकि पिछले साल की अपेक्षा धान का भाव करीब डेढ़ गुना से अधिक है। इससे सरकार को तो अच्छा मंडी शुल्क मिल ही रहा है, आढ़तियों व चावल कारोबारियों की भी बांछें खिल गई हैं। उपायुक्त अनीश यादव ने बृहस्पतिवार को लघु सचिवालय में मंडी सचिवों के साथ बैठक कर 24 घंटे कर्मियों की ड्यूटी लगाकर बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।
यूं तो हरियाणा की सीमावर्ती कई अनाज मंडियों से 1509 धान की आवक होती है। जिले में सर्वाधिक करनाल मंडी में ये धान आ रहा है। अनाज मंडी में आवक दर्ज कर गेटपास जारी किए जा रहे हैं, जिससे प्रत्येक क्विंटल पर दो प्रतिशत मार्केट फीस और दो प्रतिशत हरियाणा ग्रामीण विकास फंड (एचआरडीएफ) यानी कुल चार प्रतिशत फीस वसूल की जा रही है। करनाल मंडी में एक जुलाई से अब तक 56 लाख रुपये की मार्केट फीस एकत्र हो चुकी है।
संभावना है कि धान की आवक अगस्त माह तक भी रहेगी। इस धान को सरकार नहीं खरीद रही है, आने वाली धान को राइस मिलरों द्वारा खरीदा जा रहा है, क्योंकि यह बासमती की प्रजाति है, इसका चावल बड़ी संख्या में निर्यात भी होता है। बैठक में ऑपरेटरों को लेकर दिक्कत की बात कही गई तो उपायुक्त ने कहा कि जहां दिक्कत आए तो आने और जाने के मैन्यूअल गेट पास काटे जा सकते हैं। करनाल मंडी के सचिव चंद्रप्रकाश ने बताया कि कैमरों के बैकअप के लिए यूपीएस की मरम्मत में दिक्कत आ रही है। उपायुक्त ने कहा कि वे मुख्यालय से अनुमति लेकर यूपीएस की एनूअल मेंटीनेंस कॉन्ट्रेक्ट की व्यवस्था अपने स्तर पर ही कर लें।
बैठक में इंद्री के एसडीएम डॉ. आनंद शर्मा, करनाल के एसडीएम अनुभव मेहता, घरौंडा के एसडीएम अभय जांगड़ा, असंध के एसडीएम मनदीप कुमार तथा जोनल एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. सुशील कुमार भी मौजूद थे।
मार्केट कमेटी के सचिवों व एसडीएम के साथ बैठक की गई है, उन्हें बताया गया कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से 1509 प्रजाति का धान बड़ी मात्रा में आ रहा है। आवक के हिसाब से पूरी मार्केट फीस वसूली जानी चाहिए। मंडियों के प्रवेश द्वारों पर 24 घंटे कंप्यूटर ऑप्रेटर बैठाएं। सीसीटीवी चालू रहने चाहिए। जिससे हर गतिविधि को अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर आसानी से देख सकें। जो ढेरी नहीं बिकती या अनसोल्ड रह जाती है, उसका इंद्राज डबल-एच रजिस्टर में होना चाहिए।
- अनीश यादव, उपायुक्त करनाल
पिछले साल से डेढ़ गुना अधिक आवक
उपायुक्त ने बताया कि पिछले साल इन दिनों करनाल मंडी में 1509 धान की 63 हजार क्विंटल थी। जबकि इस साल एक जुलाई से 28 जुलाई तक 1.29 लाख क्विंटल आवक हो चुकी है। इंद्री, घरौंडा और निसिंग में भी 1509 धान की आवक हो रही है, लेकिन सबसे ज्यादा करनाल मंडी में ही है।