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एंकर- कॉलेजों में बनाए मेंटर ग्रुप, विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने में सहायक होगा प्रोग्राम

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कॉलेजों में बनाए मेंटर ग्रुप, विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने में सहायक होगा प्रोग्राम
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पेज 1 एंकर
- 25 से 30 विद्यार्थियों पर है एक प्रोफेसर, रखेगा पूरा रिकॉर्ड, समय समय पर देगा कैरियर की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
कॉलेज से पास आउट होने वाले विद्यार्थियों पर भी अब कॉलेज प्रबंधन नजर रखेगा। साथ विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने में भी कॉलेज के प्राध्यापक सहायक होंगे। कॉलेज प्रबंधन को पता होगा कि विद्यार्थी किस फील्ड में गए हैं और क्या नौकरी कर रहे हैं।
इसके लिए कॉलेेजों में मेंटर ग्रुप बनाए गए हैं। हर ग्रुप में 25 से 30 विद्यार्थी और एक प्रोफेसर शामिल हैं। समय-समय पर अध्यापक विद्यार्थियों को उनके कैरियर से संबंधित जानकारी प्रदान करेंगे। इसके लिए कॉलेज के प्रोफसर्स ने सभी विद्यार्थियों से फॉर्म भरवाया लिया है, जिसमें उन विद्यार्थियों का पूरा पता और वे भविष्य में क्या करना चाहते हैं, इस तरह की पूरी जानकारी ली गई है।
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ग्रुप में विद्यार्थी प्रोफेसर से शिक्षा संबंधी समस्याओं के साथ निजी समस्याएं भी शेयर कर सकेंगे। विद्यार्थियों की समस्याओं का समय पर निदान करने को लेकर उच्चतर शिक्षा विभाग ने सकारात्मक पहल की है। बता दें कि मेंटर ग्रुप बनाने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग ने सभी कॉलेजों को निर्देश दिए हैं। सभी प्राध्यापक इस कार्य में जुटे हुए हें।
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विद्यार्थियों को गाइड भी करेंगे मेंटर
इसमें छात्र के कॉलेज में दाखिला लेने से लेकर फाइनल ईयर की परीक्षा पास करने तक उसे एक मेंटर दिया गया है, जोकि उसे वक्त-वक्त पर गाइड करता रहेगा। क्योंकि छात्र कॉलेज में दाखिला तो ले लेते हैं, लेकिन उनमें से कई छात्रों को नहीं पता होता है कि उन्हें आगे क्या करना है। वहीं, कुछ छात्रों को फीस भरने और पढ़ाई से संबंधित प्रॉब्लम भी होती हैं। इसमें कुछ को सिलेबस तो किसी को किसी अन्य गतिविधि में शामिल होने को लेकर परेशानी होती है। इस तरह की सभी समस्याएं विद्यार्थी अपने ग्रुप के प्रोफेसर (मेंटर) को बताएंगे और वह उन विद्यार्थियों को गाइड करेंगे।
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विद्यार्थियों की करेंगे काउंसिलिंग
मेंटर एग्जाम के दौरान स्टूडेंट्स की काउंसिलिंग भी करेंगे। वहीं जो छात्र फीस जमा नहीं कर पाते या फिर बस पास बनाने में और प्रैक्टिकल में कोई दिक्कत है तो उसे भी मेंटर ही दूर करेंगे। इसके अतिरिक्त किस छात्र को जॉब मिली या फिर वह कहां आगे की पढ़ाई कर रहा है, इसका डेटा भी मेंटर समय-समय पर लेते रहेंगे। ऐसे में कॉलेज के पास भी अपने पासआउट छात्रों का डेटा रहेगा। वहीं, जिन छात्रों का पासआउट होने के बाद भी कोई समस्या है तो वह अपने मेंटर के पास जाकर मदद ले सकेंगे। इससे अलग कॉलेज प्रबंधन को यह भी पता चलेगा कि उनके कॉलेज से पढ़ने के बाद कौन सा विद्यार्थी किस क्षेत्र में कार्यरत है।
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