नौ महीने में 18 रिमाइंडर के बाद हुडा ने गेट तोड़ा, शिकायतकर्ता के पड़ोसी से संतुष्टि पत्र लिखा मामले का किया निपटारा
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
जब अधिकारी नहीं सुनते तो लोग सीएम विंडो पर जाते हैं। सीएम विंडो पर भी 18 रिमाइंडर देने के बाद भी समस्या का समाधान न हो और विभाग द्वारा शिकायत को डिस्पॉज ऑफ कर दिया जाए तो शिकायतकर्ता आखिरकार कहां जाकर शिकायत करे। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। हुडा यानि हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने न तो शिकायतकर्ता को संतुष्ट किया और न ही सीएम विंडो पर आई शिकायतों को लेकर नियुक्त किए गए तीन सदस्यों में से किसी के हस्ताक्षर कराए। बावजूद इसके शिकायतकर्ता के पड़ोसी से संतुष्टि पत्र लेकर शिकायत का निपटारा दिखा दिया। खास बात यह है कि आज भी समस्या ज्यों की त्यों है, लेकिन पल्ला झाड़ने के लिए विभाग ने आनन-फानन में शिकायत का निपटारा लिखते हुए उसे अपलोड कर दिया।
यह है मामला
सेक्टर-7 निवासी बृजमोहन सिंगला ने सात अप्रैल 2017 को सीएम विंडो पर शिकायत दी कि सेक्टर-7 की एक गली में अवैध रूप से गेट लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने मांग की थी कि इस अवैध गेट को हटवाया जाए। इस पर विभाग ने नौ माह तक शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, इस दौरान सीएम विंडो की ओर से विभाग को 17 बार रिमाइंडर दिए गए। आखिरकार शिकायत का निपटारा नहीं होने पर फिर से विभाग को नोटिस दिया तो विभाग ने 27 नवंबर को इस गेट का तोड़ दिया और एसोसिएशन पर 500 रुपये का जुर्माना भी किया। उसी दिन विभाग ने शिकायतकर्ता के पड़ोसी से संतुष्टि पत्र पर हस्ताक्षर करा लिए।
इसके बाद फिर से इस गेट को अवैध रूप से लगा लिया गया। इस पर शिकायतकर्ता ने फिर से विभाग को इसकी शिकायत दी तो विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। बार-बार रिमाइंडर मिलने से घबराए विभाग ने 27 नवंबर को हासिल किए संतुष्टि पत्र के आधार पर ही शिकायत का निपटारा कर दिया, लेकिन समस्या अब भी वैसे ही बनी है।
यह है नियम
जानकारी मुताबिक सीएम विंडो पर आई शिकायतों को लेकर शिकायतकर्ता का हस्ताक्षर युक्त संतुष्टि पत्र लेना होता है। साथ ही सीएम विंडो की शिकायतों को निपटाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से तीन सदस्यों एडवोकेट संजय मदान, अशोक मदान और सुनील गोयल की नियुक्ति की गई है। शिकायतों के निपटारे के लिए इन तीनों में से एक सदस्य के हस्ताक्षर जरूर होने चाहिए, लेकिन विभाग ने इनके भी हस्ताक्षर कराने जरूरी नहीं समझे।
समाधान कराकर ही दम लेंगे, चाहे अदालत जाना पड़े : सिंगला
शिकायतकर्ता बृजभूषण ने बताया कि वे इस मामले का समाधान कराकर दी दम लेंगे, अभी वे सीएम विंडो की कार्रवाई को देख रहे हैं। अगर यहां से समाधान नहीं किया तो वे अदालत जाएंगे। वे हर हाल में अवैध गेट को हटवाकर ही दम लेंगे। बृजभूषण ने बताया कि वे पिछले नौ माह से इस लड़ाई को लड़ रहे हैं, लेकिन हुडा के अधिकारी सीएम विंडो के अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब विभाग अपनी रिपोर्ट में मान रहा है कि गेट अवैध है और एसोसिएशन पर 500 रुपये जुर्माना तक भी किया जा चुका है, बावजूद इसके दोबारा से गेट क्यों लगाने दिया गया और क्यों नहीं उसे दोबारा से हटवाया जा रहा है।
विभाग के एसडीओ ने जाकर मौके का मुआयना किया था। रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के सभी 112 सदस्यों ने लिखकर दिया है कि ये गेट हमारी रजामंदी से लगा है और इस गेट से हमें कोई आपत्ति नहीं है। इसके साथ ही ये गेट जिस जमीन पर लगा है, यह विवादित जमीन है और इसका केस अदालत में चल रहा है, जो विचाराधीन है। इसलिए ही शिकायत को डिस्पॉज ऑफ किया गया है। -अनुपमा सांगवान, संपदा अधिकारी, हुडा।