जीएसटी पंजीकरण न कराने वाले कारोबारियों पर संकट
करनाल। जुलाई से लागू हो रही जीएसटी के लिए पंजीकरण न कराने वाले व्यापारी एक जुलाई से किसी तरह का बिल नहीं काट सकेंगे। यदि आसान शब्दों में कहें तो वे कानूनी रूप से किसी तरह का व्यापार नहीं कर पाएंगे। हालांकि यह प्रावधान सिर्फ 20 लाख रुपये सालाना इनकम वाले व्यापारियों पर ही लागू होगी, क्योंकि यही जीएसटी के दायरे में आते हैं।
जिले में सेल्स टैक्स विभाग के पास इस समय 14,253 व्यापारी पंजीकृत हैं। 13 जून तक इनमें से सिर्फ 8,312 व्यापारियों ने ही जीएसटी पंजीकरण कराया, बाकी के 5,941 व्यापारियों ने नहीं कराया। 15 जून को पंजीकरण बंद हो चुका है, इसलिए 20 लाख के अधिक इनकम वाले व्यापारियों के व्यापार पर अब खतरे की तलवार लटक रही है।
केंद्र सरकार ने व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण के लिए 1 जनवरी से ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की थी। रजिस्ट्रेशन शुरू करने से पहले सेल्स टैक्स विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को एक साल तक ट्रेनिंग दी गई और बैठक व गोष्ठी का आयोजन कर जीएसटी से होने वाले फायदे को भी बताया गया, लेकिन इसके बाद भी जीएसटी को लेकर व्यापारियों के मन में डर बैठा रहा। इसका नतीजा यह हुआ कि 6 माह में जिले के 14,253 व्यापारियों में से सिर्फ 8,312 व्यापारियों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया। हालांकि रजिस्ट्रेशन के लिए सेल्स टैक्स विभाग के पास 10,345 व्यापारियों ने फाइल जमा की है, लेकिन अधूरी जानकारी व डाटा में गड़बड़ी होने के कारण 2,033 लोगों की फाइल क्लीयर नहीं हो पाई। विभाग के अधिकारियों के अनुसार जीएसटी रजिस्ट्रेशन न कराने वाले व्यापारी इसकी अनदेखी कर खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है। एक जुलाई से उनके लिए व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि एक जुलाई से पहले केंद्र सरकार व्यापारियों को रजिस्ट्रेशन के लिए शायद एक मौका और दे, लेकिन अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई, इसलिए कुछ कह नहीं सकता।
20 लाख के दायरे से निकलने के कोशिश में लगे व्यापारी
जीएसटी रजिस्ट्रेशन में कमी का एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि ज्यादातर व्यापारी अपने आप को जीएसटी के दायरे से बाहर निकालने में जुटे हुए हैं। इसके लिए वे सीए व वकीलों के सहयोग से अपने सालाना इनकम को 20 लाख से कम करने में जुटे हैं। सेल्स टैक्स विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि 20 से 40 लाख सालाना इनकम वाले व्यापारियों के लिए हाल फिलहाल यह अच्छा रास्ता साबित हो रहा है, लेकिन आगे जीएसटी लागू होने के बाद यही इनको मुसीबत में डाल सकता है। अधिकारी ने बताया कि अभी तक रजिस्ट्रेशन कराने वाले ज्यादातर बड़े व्यापारी हैं, जिनका सालाना इनकम करोड़ों में है। वहीं एक करोड़ से नीचे वाले व्यापारियों की रजिस्ट्रेशन संख्या नाम मात्र है। इससे साफ जाहिर होता है कि वे जीएसटी से बचने के लिए अपने इनकम को कम दिखाने में जुटे हैं।
वर्जन
15 जून से जीएसटी पंजीकरण बंद हो चुका है। पंजीकरण न कराने वाले व्यापारियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि एक जुलाई को जीएसटी लागू होने पर 20 लाख से अधिक इनकम वाले व्यापारी कानूनी तौर पर किसी भी तरह का बिल नहीं काट सकेंगे।
-आनंद सिंह, डीईटीसी, सेल्स, करनाल।
बाजारों में उमड़ी भीड़, 10 से 15 प्रतिशत सस्ती हुई चीजें
जीएसटी का भय दुकानदारों व व्यापारियों के साथ ग्राहकों पर भी दिख रहा है। अन्य दिनों की अपेक्षा आजकल बाजारों में भीड़ उमड़ रही है। फिलहाल बाजार में इलेक्ट्रानिक सामान के साथ साथ अन्य चीजें 10 से 15 प्रतिशत तक सस्ती मिल रही हैं। वहीं, खाद्य पदार्थों में भी 15 प्रतिशत के रेट में कमी आई है। शुक्रवार को शहर के सर्राफा, कपड़ा व अन्य बाजारों में ग्राहकों की खासी भीड़ रही। बाजार में चर्चा है कि जीएसटी के बाद चीजें महंगी हो जाएंगी, इसलिए दुकानदार कुछ सस्ते रेट करके अपना सामान निकाल रहे हैं, वहीं ग्राहक भी इसका फायदा उठाने में पीछे नहीं रह रहे हैं।