जितेंद्र नरवाल
करनाल। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निगम क्षेत्र में अपने कच्चे मकानों को निशुल्क पक्का करवाने की चाह रखने वाले 1343 परिवार अयोग्य पाए गए हैं। इसलिए इनको योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। सर्वे के बाद निगम की जांच पड़ताल में केवल 791 परिवारों को ही लाभ के योग्य पाया गया हैं।
इनमें से भी निगम अब तक 769 को पक्का घर बनाने की किश्तें जारी कर चुका है। बाकी 22 लाभार्थियों को जल्द लाभ देने की तैयारी हो रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बीएलसी घटक के तहत कच्चे मकान को पक्का बनवाने के लिए ढाई लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाती है। इसमें दो कमरे, रसोई, शौचालय निर्माण के लिए तीन किश्तों में सहायता राशि को जारी किया जाता है।
अधिकारियों के अनुसार सर्वे में जिन लोगों के निगम में आवेदन किए थे उनकी पड़ताल की तो 1064 परिवार ऐसे मिले जिनके खुद के पक्के घर थे तो कुछ के घर सीमा के बाहर तो कुछ अनअप्रूवड एरिया में आते थे। इसके अलावा कुछ एरिया ऐसा भी था जहां योजना का लाभ ही नहीं दिया जा सकता था जैसे शहर की डेबा बस्ती का एरिया योजना में शामिल नहीं किया जाता।
बाकी कुछ ऐसे भी केस सामने आए जिनमें जमीन की मलकियत के मालिकों के पास पक्के सबूत तक नहीं थे। एक बड़ा वर्ग अपने खाली प्लॉटों के फुल एंड फाइनल एग्रीमेंट लेकर बैठा था। कुछ लोगों की जमीनों पर कोर्ट केस भी थे। वहीं, कुछ ऐसे भी आवेदक मिले जिन्होंने दो दो बार आवेदन करवा दिया। जिनकी पड़ताल में छंटनी हुई तो जानकारी में आए।
सर्वे में 279 परिवार नहीं मिले
प्रधानमंत्री आवास योजना के बीएलसी घटक के सर्वे और आवेदन करने वाले कुल 2134 आवेदकों में से फिलहाल 279 परिवार ऐसे भी हैं जो अब गुम हो चुके हैं। यानी एएचपी की तरह बीएलसी में भी आवेदकों के स्थायी पते और मोबाइल नंबर बदले जा चुके हैं। जो लोग सर्वे के दौरान किराए पर रहते थे वे भी अब कहीं ओर रहने लगे हैं। इसलिए ये परिवार भी योजना का लाभ नहीं उठा सके।
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