अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सरकार द्वारा 700 निजी बसों को किलोमीटर स्कीम के तहत सड़कों पर उतारने की पॉलिसी के विरोध में मंगलवार को करनाल डिपो में 169 बसों के पहिए थमे रहे और 21 बसें लांग रूट पर भेजी गईं, जो शाम तक वापस पहुंची। जीएम के अनुसार एक दिन की हड़ताल में रोडवेज को करीब 17 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं, दिनभर यात्री प्राइवेट बसों के पीछे दौड़ते रहे। यात्रियों ने जान जोखिम में डालकर प्राइवेट बसों में यात्रा की, प्राइवेट बस में न तो अंदर पांव रखने की जगह थी और न ही छत पर, इतना ही नहीं यात्री बस की खिड़की पर लटके हुए थे। जिन रूटों पर प्राइवेट बस नहीं थी उन यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई, क्योंकि उन्हें प्राइवेट वाहन किराए पर करके जाना पड़ा।
बता दें कि करनाल डिपो में करीब 19 रूट हैं, जिनपर 71 प्राइवेट बस चलती हैं। चक्का जाम होने पर जहां रोडवेज को लाखों रुपये का नुकसान हुआ तो वहीं प्राइवेट बसों को फायदा हुआ, क्योंकि कई प्राइवेट बसों ने तो अपने निर्धारित चक्कर से ज्यादा चक्कर लगाए। शहर से ग्रामीण क्षेत्र में जाने वाले ऑटो भी आज भरकर चले। वहीं दूसरी ओर बस स्टैंड परिसर में रोडवेज बस खड़ी रहीं और रोडवेज कर्मचारियों ने वहीं बैठकर धरना भी दिया और सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया।
गौरतलब है कि 23 जुलाई को ही रोडवेज कर्मचारियों ने बसों का चक्का जाम करने की घोषणा कर दी थी। महानिदेशक को भी पत्र लिखा गया था, लेकिन इन 15 दिनों में सरकार और यूनियन के बीच कोई बातचीत नहीं हुई। प्राइवेट बस शाहबाद, असंध, पुंडरी, नीलोखेड़ी, सीतामाई, डांड, इंद्री आदि रूटों पर चली।
सरकार के सामने रखी थीं 15 मांगें
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन महासंघ से संबंधित डिपो के सचिव ईश्वर सिंह ने बताया कि उन्होंने सरकार के समक्ष 15 मांगें रखीं थीं। इनमें सबसे पहली मांग थी कि सरकार ने जो 700 निजी बसों को किलोमीटर स्कीम के तहत सड़कों पर उतारने का सोचा है उस गलत पॉलिसी को खत्म किया जाए, क्योंकि इस पॉलिसी के अनुसार इन बसों में ड्राइवर प्राइवेट और परिचालक सरकारी होगा। इससे अलग पंजाब के समान वेतन, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, दस हजार नईं बसें चलाना आदि शामिल थी, लेकिन सरकार ने कहा कि पहली मांग 700 निजी बसों को छोड़कर, दूसरी मांगों पर विचार किया जाएगा। इसलिए यूनियन ने चक्का जाम का निर्णय लिया।
गांव से शहर में ही नहीं आ पाए ग्रामीण
मंगलवार सुबह 4 बजे से रोडवेज बसों का चक्का जाम शुरू हो गया था। रात को जो बस जहां पहुंची थी वह वहीं रही। इस लिए ग्रामीण से शहर में आने वाले यात्री शहर में ही नहीं पहुंच पाए। इसमें सबसे ज्यादा संख्या स्कूल और कॉलेजों में जाने वाले विद्यार्थियों की है। इस लिए स्कूल कॉलेज में भी बहुत कम संख्या में विद्यार्थी पहुंच पाए।
दिनभर बस स्टैंड के बाहर लगी रही यात्रियों की भीड़
चक्का जाम होने के कारण प्राइवेट बस स्टैंड के बाहर ही खड़ी थी और यात्रियों को वहीं से बैठा रही थी। इस लिए पूरा दिन बस स्टैंड के बाहर जाम लगा रहा। एक तरफ प्राइवेट बसों की लाइन लगी हुई थी तो दूसरी ओर ऑटो और अन्य वाहनों की लाइन लगी हुई थी।
दो घंटे से बस का इंतजार
बस स्टैंड के बाहर बस के इंतजार में खड़ी शांति देवी ने बताया कि मुझको असंध जाना है। दो घंटो से यहां पर बैठी हूं। सरकारी बसें न चलने के कारण प्राइवेट बस दिखते ही सवारी उसकी और दौड़ पड़ती हैं, जिस कारण हम बुजुर्ग उसके अंदर चढ़ नहीं पाते हैं। पता नहीं आज घर पहुंचेगे या नहीं।
खड़े-खड़े पैर दर्द करने लगे हैं
पूंडरी से आई काजल देवी ने बताया कि रोडवेज की बसे न चलने के कारण प्राइवेट बस में इतनी भीड़ थी कि आराम से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। खड़े-खड़े पैरों में दर्द होने लगा है। सरकारी बस चल नहीं रही हैं तो प्राइवेट में जगह नहीं मिल रही है। ऐसे में वे कैसे अपने घर तक पहुंचेंगी।
समय पर नहीं पहुंच पाया अस्पताल
असंध से हिम्मत सिंह का कहना है कि मैं करनाल में एक प्राइवेट अस्पताल में नौकरी करता हूं। सुबह बस ने मिलने के कारण समय पर ड्यूटी नहीं पहुंच पाया। जिस कारण बॉस की डांट खानी पड़ी। इसी प्रकार स्कूल व कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र भी समय पर अपने स्कूल व कॉलेज में नहीं पहुंच पाए, जिसके कारण उनको अपनी क्लास छोड़नी पड़ी।
बस न मिलने से नहीं हो पाया इलाज
असंध से आई मीना देवी ने बताया कि बस न मिलने से समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकी। जिस कारण ईलाज नहीं हो पाया। अब कल फिर आना पड़ेगा। इन हड़तालों से बुजुर्गो को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अफरा तफरी में चोट लगने का खतरा
बडौली जाने के लिए बस के इंतजार में बैठे सुनहरी देवी का कहना है कि रोडवेज की बसों की हड़ताल होने की वजह से यात्री इधर उधर भटक रहे हैं। प्राइवेट बस को देख यात्रियों में अफरा-तफरी मच जाती है। जिस कारण चोट लगने का खतरा रहता है।