नीट में भी छाये करनाल के विद्यार्थी, विशांत ने पाया 183वां रेंक
देश में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए नीट का परीक्षा परिणाम घोषित
मेडिकल, इंजीनियरिंग की कोचिंग के लिए उत्तर भारत का पहला शिक्षण संस्थान बना जेनिसिस 15 विद्यार्थियों के आए 500 से अधिक अंक
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। देशभर में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए ऑल इंडिया स्तर पर ली जाने वाली प्रवेश परीक्षा नीट के घोषित किए गए परिणाम में भी करनाल के स्टूडेंट्स छाए। करनाल के विशांत गुप्ता ने 652 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया में 183वां रैंक हासिल किया है। इसके अलावा भी शहर के 14 विद्यार्थियों ने 500 से अधिक अंक प्राप्त कर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने में सफलता अर्जित की। परिणाम जारी होने के बाद परिजनों व टीचरों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर मुबारकबाद दी।
वहीं, जेनिसिस क्लासिस परिसर में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। जेनेसिस क्लासिस के 15 बच्चों ने परीक्षा पास की है। जेनिसस क्लासिस के डायरेक्टर जितेंद्र अहलावत तथा नवनीत सिंह ने स्टूडेंट्स को बधाई दी है। बता दें कि विशांत गुप्ता 652 अंक, ऐंजला जैन 589 अंक, कनिष्का गर्ग 587 अंक, पांखुड़ी गुप्ता 578 अंक, जागृति लाठर 561 अंक, निर्भय प्रताप हुडा 554 अंक, साक्षी मलिक 549 अंक, दीक्षा भाटिया 542 अंक, अंजलि बंसल 540 अंक, सांची राणा 533 अंक, अंशिका सैनी 531 अंक, गायत्री सनूजा 521 अंक, रीया गोयल 517 अंक, राहुल बीजू 515 अंक हासिल करके परीक्षा पास की है।
कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहता है विशांत
नीट में 652 अंक प्राप्त कर 183वा रैंक प्राप्त करने वाला विशांत गुप्ता कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहता है। विशांत ने नीट में फिजिक्स में 161, केमेस्ट्री 161, बॉयोलाजी में 330 अंक प्राप्त किए। विशांत के पिता विजय पाल गुप्ता तथा माता विभा गुप्ता ने सेक्टर-13 स्थित निवास पर खुशियां मनाई। गुप्ता ने बताया कि 12 से 13 घंटे नियमित पढ़ाई और जेनिसिस क्लासिस में बैठकर ग्रुप डिस्कशन सफलता का राज रहा।
बड़ी सफलता के लिए छोटी खुशियों का बलिदान जरूरी
सेक्टर-9 में रहने वाली कनिष्का गुप्ता ने 587 अंक प्राप्त कर 2628वा रैंक प्राप्त किया। उसकी सफलता का मूलमंत्र बड़ी सफलता के लिए छोटी खुशियों का बलिदान जरूरी है। गुप्ता ने कहा कि अंकों की चिंता नहीं करनी चाहिए। उसके पिता केवल गर्ग और माता रश्मि गर्ग ने बताया कि उनकी बेटी रेडियोलॉजिस्ट बनना चाहती है। इस सफलता के लिए 10 से 12 घंटे पढ़ाई की।
पांखुड़ी बनना चाहती है रेडियोलॉजिस्ट
नीट में 578 अंक प्राप्त कर मेडिकल कॉलेज में दावेदारी सुनिश्चित करने वाली पांखुड़ी रेडियोलॉजिस्ट बनना चाहती है। अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और जेनिसिस को दिया है। उसने बताया कि 10 से 12 घंटे तक लगातार पढ़ाई की।
वहीं, नीट में 561 अंक प्राप्त करने वाली जागृति लाठर ने 4887 रैंक हासिल किया। मेडिकल के क्षेत्र में वह कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती है। सेक्टर 5 स्थित निवास पर पिता जोगिंद्र लाठर तथा माता रेखा लाठर ने इश पर खुशी जाहिर की। जागृति ने बताया कि टेस्ट सीरिज के साथ नोट्स और एनसीआरटी की किताबें पढ़ी। उसने अपने पिता को अपना प्रेरक बताया। उसने रटने की बजाये समझने की कोशिश की, इस कारण परीक्षा पास हो सकी।
एंडोंक्राईनोलाजी में रिसर्च करना चाहती है निर्भय प्रताप सिंह
नीट की परीक्षा में 554 अंक प्राप्त करने वाला निर्भय प्रताप हुडा की ऑल इंडिया रेंक 5611 रही। उत्तराखंड से आकर करनाल में पढ़ाई करने वाले निर्भय प्रताप सिंह हुडा ने पहली बार में ही सफलता अर्जित कर ली। उसकी माता रेनू ने यहां रहकर 2 साल तक बेटे के साथ मेहनत की। निर्भय एंडोंक्राईनोलाजिस्ट बनना चाहता है।
दिक्षा भाटिया बनना चाहती है न्यूरोलॉजिस्ट
नीट की परीक्षा में 542 अंक प्राप्त करने वाली दिक्षा भाटिया ने प्रकाश पब्लिक स्कूल ने 93.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उसकी नीट में ऑल इंडिया रेंक 7099 रही। वह न्यूरोलॉजिस्ट बनना चाहती है। उसने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता और जेनिसिस को दिया।
मेडिकल के क्षेत्र में रिसर्च करना चाहती है अंजलि बंसल
नीट में 540 अंक प्राप्त करने वाली तरावड़ी कस्बे की प्रतिभाशाली छात्रा अंजलि बंसल ने सफलता के कीर्तिमान स्थापित किए। उसने ऑल इंडिया 7354 रैंक प्राप्त की। उसके पिता दिनेश बंसल व्यवसायी है। उसने पहले बार में ही सफलता अर्जित की। वह मेडिकल के क्षेत्र में रिसर्च करना चाहती है। वहीं, नीट में 517 अंक प्राप्त करने वाली रीया गोयल गायनिक बनना चाहती है। प्रताप पब्लिक स्कूल से 12वीं में 93.6 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली गोयल ने बताया कि वह 10-12 घंटे की तक पढ़ती है।