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121 एमएम बरसात, 11 साल का टूटा रिकार्ड

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सावन की शुरुआत के साथ झमाझम बरसात ने 11 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। मौसम विभाग के अनुसार जिले में 121 एमएम बारिश रिकार्ड की गयी है, जो 2009 के बाद से रिकार्ड है। बारिश से एक ओर जहां किसानों के चेहरे खिल उठे, वहीं दूसरी ओर शहरवासियों को गर्मी से राहत मिली है। शनिवार देर रात से शुरू हुई बारिश रविवार सुबह तक जारी रही।
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पिछले कई दिनों से चिलचिलाती गर्मी और धूप से लोग परेशान थे। मौसम विभाग की ओर से जून के आखिरी सप्ताह में मानसून की संभावना जतायी गयी थी, ऐसे में पिछले कई दिनों से सभी को बारिश का इंतजार था। शनिवार को हुई बारिश से जहां धान रोपाई के कार्य को गति मिलेगी। वहीं गन्ना और चारे की फसलों को बहुत फायदा होगा। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के मौसम विभाग के अनुसार करनाल में 121 एमएम वर्षा दर्ज की गई। इससे पहले 2009 में इतनी बारिश हुई थी, जबकि जिले में सर्वाधिक 242 एमएम बारिश 1968 में हुई थी।
रविवार को अधिकतम तापमान 32 एमएम और न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग की ओर से अब 11 जुलाई तक बादल छाने, बूंदाबांदी या हल्की बारिश की संभावना जतायी जा रही है। करनाल के अलावा कैथल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर और पानीपत में भी देर रात से सुबह तक बरसात होती रही। कैथल में 42 एमएम, अंबाला में 40.2 एमएम, पानीपत में 30 एमएम तथा कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में भी करीब 40 एमएम बरसात रिकार्ड की गयी। कुरुक्षेत्र में अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री व न्यूतनतम 25.6 डिग्री सेल्सियस रहा। यमुनानगर व अंबाला में अधिकतम 37 व न्यूनतम 23, कैथल में अधिकतम 37 व न्यूनतम 26 तथा पानीपत में अधिकतम 37 व न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहा।
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शहर में जलभराव से लोग परेशान
मानसून की पहली बारिश में ही शहर में पानी निकासी के दावे फेल साबित हुए। जगह-जगह जलभराव से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। शिव कॉलोनी के समीप बने रेलवे अंडरपास में पानी भरने से रास्ता अवरुद्ध हो गया। अंडरपास में पानी में कई वाहन फंस गए। वहीं गौशाला रोड पर जनकपुरी के समीप जलभराव से लोगों की आवाजाही बाधित हुई। वहीं शहर की कई कालोनियों और गलियों में नालियों का निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसी जगहों पर कीचड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई।
इस साल करनाल में वर्षा का आंकड़ा
जनवरी 74.3 एमएम, फरवरी 21.4 एमएम, मार्च 161.7 एमएम, अप्रैल 26 एमएम, मई 66.8 एमएम, जून 103.9 एमएम, जुलाई अब तक 123.8 एमएम
कृषि विकास प्रतिष्ठान रंबा के अध्यक्ष कृषि विशेषज्ञ डा. सरदार सिंह का कहना है कि यह बारिश रामबाण साबित हुई है। धान की पछेती किस्मों की रोपाई में पानी की बचत होगी। इस समय केवल दलहन की फसलों को नुकसान हो सकता है। सब्जी की फसलों में कोई नुकसान नहीं। क्योंकि अभी बेल वाली फसलें चल रही हैं। भिंडी की फसल में कोई नुकसान नहीं होगा।
समय से पूरा होगा रोपाई का लक्ष्य
कृषि विभाग के तकनीकी अधिकारी डा. रतन सिंह का कहना है कि जिले में धान रोपाई का लक्ष्य 1.70 लाख हेक्टेयर है। करीब 70 प्रतिशत रोपाई हो चुकी है। लेबर सीमित है इसलिए रोपाई का कार्य धीरे-धीरे चल रहा है। उम्मीद है समय से रोपाई का लक्ष्य पूरा होगा।
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