अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। बुक सेलरों के साथ मिलीभगत कर किताबें बेचने वाले प्राइवेट स्कूलों पर अब कार्रवाई होगी। रविवार को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्र में चेक कराएं कि कहां-कहां मिलीभगत कर किताबें बेचने का खेल चल रहा है। निर्देशों में उन्होंने यह भी कहा है कि ऐसे स्कूलों पर सेकेंडरी शिक्षा महानिदेशक के आदेशानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह आदेश भी उन्होंने तब जारी किए जब अमर उजाला ने मामले को रविवार के अंक में प्रमुखता से उठाया।
गौरतलब है कि करनाल में स्कूलों में एडमीशन शुरू होते ही बुक सेलरों और स्कूल संचालकों का मिलकर किताबें बेचने का खेल शुरू हो गया। कहीं स्कूलों के अंदर तो कहीं बाहर स्टाल लगाकर प्राइवेट प्रकाशक की किताबें बेची जा रहीं हैं। इसकी एवज में उन्हें बुक सेलरों से मोटा कमीशन मिला है, लेकिन अपने मोटे मुनाफे के चक्कर में स्कूल नियमों को ताक पर रखते हुए एनसीईआरटी की जगह प्राइवेट प्रकाशक की किताबें लगवा रहे हैं।
सात दिन में महानिदेशक को देनी है रिपोर्ट
सेकेंडरी शिक्षा महानिदेशक ने भी मामले पर संज्ञान लेते हुए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर जांच के आदेश दिए थे। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि निजी स्कूल अपने परिसर में दुकानें खोलकर किताबें, वर्दी और स्टेशनरी आदि बेचते हैं। वहीं, प्रकाशक की बुक लगवाना भी हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियमावली 2003 और अन्य नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच करते हुए सभी शिक्षा अधिकारी उन्हें एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट भेजें, ताकि स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
25 सौ रुपये में बिक रहा यूकेजी का 350 रुपये वाला सेट
सीबीएसई और हरियाणा बोर्ड की ओर से गाइडलाइन है कि स्कूल को एनसीईआरटी की किताबें ही लगानी हैं। और इन्हें भी एमआरपी से अधिक मूल्य पर नहीं बेच सकते, लेकिन इसके बावजूद भी स्कूल प्राइवेट प्रकाशक की किताबें बेच रहे हैं, क्योंकि स्कूलों को प्राइवेट किताबों में 40 से 50 प्रतिशत कमीशन मिल रही हैं, जबकि एनसीईआरटी की किताबों से स्कूलों को कोई लाभ नहीं होता। मार्केट में एनसीईआरटी की यूकेजी से पांचवीं कक्षा की किताबों का सेट 350 रुपये है। वहीं, स्टाल पर 2500 से 4500 रुपये तक बिक रही हैं। इसी तरह अन्य कक्षाओं की किताबों के भी दस गुना ज्यादा रेट हैं।