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ऑन लाइन खरीद को लेकर आढ़ती और किसान आमने सामने

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। ऑनलाइन खरीद को लेकर आढ़ती एसोसिएशन और किसान और भाकियू किसान यूनियन आमने सामने आ गई हैं। आढ़ती ऑनलाइन खरीद का विरोध कर रहे हैं तो वहीं किसान इसका समर्थन कर रहे हैं। यह भी कह रहे हैं कि किसानों के खाते में सीधे भुगतान होना चाहिए। इस प्रणाली से पारदर्शिता आएगी। भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने कहा कि आढ़ती अपने स्वार्थ लिए ऑनलाइन खरीद का विरोध कर रहे हैं और हड़ताल कर रहे हैं। आढ़तियों को किसानों की चिंता होती तो वे हड़ताल पर नहीं जाते। उनके हड़ताल करने से किसानों को परेशानी हो रही है। किसानों ने ऑनलाइन खरीद और डायरेक्ट किसानों के खाते में भुगतान की व्यवस्था को अच्छा फैसला बताया है। इस व्यवस्था से किसान आढ़तियों के चंगुल से निकल जाएंगे।
बुधवार सुबह अनाज मंडी में आढ़तियों की दोनों एसोसिएशन ने अलग-अलग ऑनलाइन प्रणाली का विरोध किया। इनमें से एक गुट ने मार्केट कमेटी सचिव को ज्ञापन भी सौंपा। इस समय अनाज मंडी में 1650 क्विंटल गेहूं पड़ा हुआ है, जिसे अभी तक खरीदा नहीं गया है। पिछले साल की बात करें तो जिले में 93 लाख 58 हजार 61 क्विंटल गेहूं की खरीदारी हुई थी, जबकि अकेले करनाल मंडी में 16 लाख 87 हजार 594 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई थी।
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फसल किसानों की, कमीशन आढ़तियों को क्यों
भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष ने कहा है कि एक फसल पर किसान छह महीने तक दिन रात मेहनत करता है। जब फसल पक कर तैयार हो जाती है तो वह उसे खुद बेचने जाता है। तो उसकी फसल को बेचने का ढाई प्रतिशत कमीशन सरकार आढ़तियों को दे देती है और किसानों को उसकी फसल का उचित दाम भी नहीं देती। किसानों के खेत में फसल कम निकले या ज्यादा, उचित रेट मिले या ना मिले, लेकिन आढ़तियों का कमीशन खरा होता है।
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दूसरे राज्यों का भी खरीदा जाए गेहूं
आढ़ती जिले सिंह, अमित गर्ग, हीरा लाल, राकेश चौधरी, महेंद्र सिंह, गुरदयाल सिंह आदि ने कहा कि दूसरे राज्यों के किसानों की भी फसल अनाज मंडी में बेची व खरीदी जाए। वे भी किसान हैं।
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