संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। घरों की दीवारों पर सजी सांझी माता का अष्टमी सायंकाल में विसर्जन शुरू हो गया। अनेक महिलाओं ने कपिल सरोवर पहुंचकर अपने घरों की दीवारों पर लगी सांझी माता को विसर्जित किया।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि सांझी पर्व हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के कुछ क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में नवरात्र का विशेष महत्व है। ये त्योहार साल में चार बार आता है। इनमें शारदीय नवरात्र सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान लोग 9 दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों का पूजन करते हैं। सबसे खास बात है कि शारदीय नवरात्रि में कई घरों में सांझी माता का भी पूजन किया जाता है। जो कि कला व लोकसंस्कृति को दर्शाता है। नौ दिनों तक सांझी माता का पूजन करने के बाद उनका विसर्जन किया जाता है।
विसर्जन से पहले सांझी को पूजा जाता है और उनको भोग लगाया जाता है। इसके बाद उसे दीवार से उतारकर आस-पास मौजूद किसी तालाब में विसर्जित कर दिया जाता है। उधर, मां के चल रहे नवरात्रों में श्रद्धालुओं ने मां महागौरी की पूजा अर्चना की। मंदिर के पुजारी अनिरुद्ध गौतम ने बताया कि मां महागौरी को मां पार्वती भी कहा जाता है। उन्होंने कहा दुर्गा अष्टमी पर कंजका पूजन के लिए कन्याओं की भारी कमी देखने को मिली। छोटी कंजकाओं के पूजन के लिए श्रद्धालु सुबह से ही परेशान रहे।