दो साल पहले पूर्व डीसी डा. प्रियंका सोनी द्वारा शुरू करवाई गई विद्या वाहिनी बस सेवा शुरू न होने के कारण शहर में बस अड्डे से विभिन्न स्कूल कॉलेजों तक व छुट्टी के बाद स्कूल कॉलेजों से बस अड्डे तक छात्राओं को सड़क पर भटकना पड़ रहा है। पहले विद्या वाहिनी बस विशेष रुप से इन छात्राओं के लिए चलवाई गई थी। जो सुबह एवं शाम छात्राओं को बस अड्डे से शिक्षण संस्थानों तक शिक्षण संस्थानों से बस अड्डे तक छोड़ने का काम करती थी।
अब कोरोना काल के बाद जब सभी तरह की सेवाएं शुरू होने लगी हैं तो बेटियों ने फिर से इस बस सेवा की मांग शुरू कर दी है। उनका कहना है कि उन्हें सड़क पर पैदल चलते हुए काफी दिक्कतें होती हैं। पूर्व की भांति यह बस सेवा शुरू की जाए। अमर उजाला ने इस संबंध में बेटियों से बात की। जिसमें उन्हाेंने अपनी समस्याएं रखीं।
पैदल तय करना पड़ता है सफर
आईटीआई की छात्रा नीशू ने कहा कि वे आईटीआई से बस स्टैंड तक का सफर पैदल तय करते हैं। जिससे देरी से कक्षा में पहुंचती है। उसने कहा कि यदि सुबह विद्या वाहिनी चले तो सुबह बस अड्डे से आईटीआई और आईटीआई से दोपहर बाद बस अड्डे पर जल्दी पहुंच जाएंगी तो घर भी जल्दी पहुंचेंगी।
जल्द शुरू हो विद्या वाहिनी बसें
आईटीआई की छात्रा सोनिया ने कहा कि विद्यावाहिनी बसों के संचालन न होने से उन्हें आटो व अन्य साधनों में अतिरिक्त किराया देकर आना पड़ता है। जिससे उनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्या वाहिनी बस चलाई जाए।
ऑटो में दोगुना देना पड़ता है किराया- आरकेएसडी कॉलेज छात्रा काजल ने कहा कि वे गांव से भी शहर तक आटो में आती है और कालेज पहुंचने के लिए भी आटो का सहारा लिया जाता है। इस दौरान उन्होंने दो गुना किराया देना पड़ता है। उन्हें जल्द विद्यावाहिनी बसें चलाई जाने की मांग की।
ठंड के मौसम में होती है ज्यादा समस्या- कालेज छात्रा रीतू ने कहा कि सर्दियों के मौसम में ज्यादा समस्या हो रही है। एक तो गांव में भी बसों की सुविधा नहीं दूसरा शहर से कालेज तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि ज्यादा समस्या सर्दी के मौसम में होती है।
पढ़ाई भी हो रही प्रभावित- कालेज छात्रा मोनिका का कहना है कि शिक्षण संस्थानों में पहुंचने के लिए साधन नहीं है। आटो संचालक भी सवारियां होने के बाद ही चलते हैं। जिस कारण से कक्षाओं में देरी से पहुंचते और पढ़ाई प्रभावित हो रही है।