कोडिंग मशीन से नकली चाबी बनाने का काम करते हुए
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गाड़ियां चोरी करने के बाद एमएससी मैथ कर चुके देहरादून से परणीत सहित हिसार से बीटेक कुलदीप गाड़ियाें में आवश्यक बदलाव का काम करते थे। चोरी करते समय भी मैगनेट सहित कई उपकरणों का प्रयोग करते हुए गाड़ी को लॉक फ्री किया जाता था। इसके बाद पूरी रेकी के साथ गाड़ी चुराते थे। पुलिस पूछताछ में अभी कई और खुलासे होने हैं।
गिरफ्तार किए गए शुभम और गुरमीत ने बताया कि वे अपने तीसरे साथी चेतन के साथ फतेहाबाद, पिहोवा, यमुनानगर, नीलोखेड़ी और हरियाणा और दिल्ली सहित कई इलाकों से गाड़ी चोरी कर चुके हैं। रात को तीनों गाड़ी लेकर निकल जाते थे और एरिया में घूमकर बाहर खड़ी किसी गाड़ी की रेकी करते थे। उनके पास गाड़ी की चाबी बनाने के लिए कोडिंग मशीन होती है। दो लोग दूर से आने-जाने वालों पर निगरानी रखते थे और शुभम गाड़ी के पास पहुंचकर गाड़ी के बाई तरफ के शीशे की तरफ से पेचकस डालकर शीशे को तोड़कर डैशबोर्ड खोलकर सेंट्रल लॉक की डिब्बी को हटा देता था। जिससे गाड़ी की खिड़की खोलते समय सायरन की आवाज नहीं आती है। फिर गाड़ी की खिड़की खोलकर स्टेयरिंग के नीचे के प्लास्टिक कवर को खोल दिया जाता है। उनके पास एक हैवी मैगनेट होता है। मैगनेट को स्टेयरिंग के नीचे चिपकाते ही स्टेयरिंग का लॉक फ्री हो जाता है। फिर स्टार्टिंग स्विच को इग्नीशियन स्विच से निकाल दिया जाता है। फिर गुरमीत कोडिंग मशीन साथ लेकर गाड़ी में जाता है और शुभम तथा चेतन रेकी करते हैं। गुरमीत इग्नीशियन स्विच में चाबी लगाकर कोटिंग मशीन के साथ चाबी की कोडिंग कर देता था। इसके बाद स्टार्टिंग स्विच में पेचकस लगाकर गाड़ी स्टार्ट हो जाती है। इसके बाद तीनों गाड़ी चोरी करके अपने साथ ले जाते थे। उस गाड़ी को ले जाकर तीनों शिव कॉलोनी करनाल में कोई खाली जगह देखकर वहां पर कवर ढककर खड़ी कर देते थे और इंतजार करते थे कि कोई इस गाड़ी को लेने आता है या नहीं। बीच-बीच में शुभम या चेतन उस गाड़ी को चेक करने भी आते रहते थे। कुछ दिन बाद वह चोरीशुदा गाड़ी अपने साथी परणीत निवासी मील रोड चौक बाजार डोईवाला जिला देहरादून उत्तराखंड को औने-पौने दाम में बेच देते थे। इसके बाद परणीत यह चोरीशुदा गाड़ियां नरेश कुमार उर्फ काला निवासी संडील जिला जींद, कुलदीप उर्फ जेपी निवासी देवबन, विशाल निवासी आजाद नगर हिसार, संदीप निवासी लक्ष्मी विहार कॉलोनी हिसार को बेच देता है, जो ये सभी स्क्रैप की गाड़ी खरीदने का धंधा करते हैं। इसके बाद ये पांचों आरोपी स्क्रैप वाली गाड़ियाें के चेसिस नंबर के पार्ट की कटिंग करके चोरीशुदा गाड़ियाें के चेसिस नंबर के पार्ट की जगह वेल्डिंग करके उस पर पेंट करके उसको अच्छे से सेट कर देते हैं। लेकिन उन गाड़ियाें का इंजन नंबर नहीं बदलते हैं। कई गाड़ियाें के इंजन नंबरों पर ग्राइंडर मार देते हैं। फिर उस गाड़ी पर स्क्रैप वाली गाड़ी की नंबर प्लेट लगा देते हैं। स्क्रैप में खरीदी गई गाड़ी के कागजों का प्रयोग चोरीशुदा गाड़ियाें पर किया जाता है। उन गाड़ियाें पर नंबर प्लेट व चेसिस नंबर तो स्क्रैप वाली गाड़ियाें का होता है, लेकिन इंजन नंबर चोरी वाली गाड़ियाें का होता है या ग्राइंडर किया होता है। जो इस प्रकार से तैयार की गई गाड़ियाें को बाहर मार्केट में बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया जाता है। संवाद
कोई बीटेक तो किसी ने की एमएससी मैथ से पढ़ाई
कम समय में अधिक पैसा कमाने के लिए अलग तकनीक से चोरी की वारदात को अंजाम देने लगे। इनमें आरोपी गुरमीत(28) ने बीए, शुभम(22) ने बीए, आईटीआई, परणीत(35) ने एमएससी मैथ, विशाल(39)12वीं, नरेश(38)10वीं, संदीप(34) ने बीए व कुलदीप(37) ने बीटेक की पढ़ाई की हुई है। फिलहाल आरोपी बेरोजगार होने के कारण इस वारदात में तो नहीं शामिल हो रहे मामले को इस तरह से भी जोड़कर देख रही पुलिस। ये अभी जांच का विषय है।