संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला चीका। भीषण गर्मी के बीच खेतों में गेहूं के फानों और घास में लगाई जा रही आग अब सड़क किनारे खड़े पेड़ों के लिए भी खतरा बनती जा रही है। खेतों से उठने वाली आग सड़क किनारे तक पहुंचकर हरे-भरे पेड़ों को अपनी चपेट में ले रही है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।
कुछ किसान खेतों में खड़े गेहूं के फानों और घास को नष्ट करने के लिए आग लगा रहे हैं। हालांकि इससे खेतों का अवशेष तो जल जाता है, लेकिन कई बार आग फैलकर सड़कों तक पहुंच जाती है और सड़क किनारे खड़े पेड़ों को नुकसान पहुंचाती है। आग की चपेट में आने से सूखे पेड़ तो जलकर राख हो ही रहे हैं, वहीं हरे-भरे पेड़ भी झुलसकर बाद में सूखने लगते हैं।
एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और पेड़ों को बचाने के लिए लगातार अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों की लापरवाही इन प्रयासों को नुकसान पहुंचा रही है। बढ़ती आगजनी की घटनाओं ने पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि सड़क किनारे लगाए गए पौधों को बड़ा होने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन आग की एक घटना उन्हें कुछ ही मिनटों में नष्ट कर देती है। लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि खेतों में आग लगाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पेड़ों और पर्यावरण को बचाया जा सके।
सड़कों के किनारे आग लगाए जाने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम पहुंचती है और आग लगाने वाले लोगों चालान किए जा चुके हैं। वन विभाग आग की ऐसे घटनाओं को रोकने के लिए पूरी तरह से तत्पर है। -सतबीर सिंह, रेंज अधिकारी वन विभाग।