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10 घंटे 109 बसों का थमा पहिया, रोडवेज को 15 लाख का घाटा

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भारत बंद के आह्वान पर सुबह छह बजे से शाम चार बजे तक कैथल डिपो की 109 बसों का 10 घंटे पहिया थमा रहा। दैनिक औसत के हिसाब से डिपो को लगभग 15 लाख रुपये का नुकसान दर्ज किया गया। रोजाना की तरह सुबह कैथल से अंबाला, कुरुक्षेत्र व हिसार के लिए रवाना हुई बसों को जाम लगा रहे लोगों ने बीच रास्ते में ही रोक दिया। हिसार की ओर जाने वाली बस तितरम मोड़ और अंबाला जाने वाली बस गांव थाना व कुरुक्षेत्र जाने वाली बस को पूंडरी से वापस कैथल आना पड़ा। इससे बस में सवार यात्रियों को दूसरे वाहनों में गंतव्य स्थानों पर पहुंचना पड़ा।
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बता दें कि रोजाना बसों में सफर करने वाले लगभग बीस हजार मुसाफिरों की राहें दस घंटे तक बसों का पहिया थमने से रुकी रहीं। सुबह छह बजे से लेकर शाम चार बजे तक रोडवेज और प्राइवेट की बसें एक ठिकाने लगी रहीं। इससे पहले अलग-अलग रूटों पर रवाना हुई बसों को भी बीच रास्ते में जाम लगा रहे किसानों ने रोक दिया। इसके बाद इन बसों को वापस डिपो में खड़ा किया गया। इसके बावजूद काफी संख्या में लोग बस अड्डों पर पहुंच रहे थे, बसें बंद होने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ी।
अधिकतर लोगों को प्राइवेट वाहनों को सहारा लेना पड़ा। बसों के संचालन न होने से कैथल डिपो को लगभग 15 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। संवाद
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निजी वाहन चालकों ने कूटी चांदी
सुबह छह बजे से शाम चार बजे तक बसें न चलने से निजी वाहन चालकों ने खूब चांदी कूटी। कुछ वाहन चालकों ने तो यात्रियों से सामान्य किराये से ज्यादा पैसे वसूल किए। वहीं, यात्रियों को भी मजबूरी वश अपने गंतव्य तक जाने के लिए वाहन चालकों को तय किराये से ज्यादा पैसे देने पड़े। अंबाला से कैथल पहुंचे यात्रियों विकास, मोनू और अशोक ने बताया कि वे अंबाला से कैथल पहुंचे थे। इसके बाद इन्हें किसी कार्य के लिए सीवन जाना था। बसें बंद होने से उन्हे निजी वाहनों में सफर तय करना पड़ा। इस दौरान उनसे 150 रुपये प्रति सवारी के हिसाब से किराया वसूला गया, जबकि कैथल से अंबाला के लिए 90 रुपये किराया निर्धारित है।
बसें बंद से छात्र रहे सबसे ज्यादा परेशान
बसें बंद होने से सबसे ज्यादा समस्या विद्यार्थियों को हुई। वे कॉलेजों तक पहुंच नहीं पाए। उधर, रात्रि ठहराव के लिए ग्रामीण क्षेत्र में बसें एक दिन पहले बंद की गई। इससे गांव पाई, भाणा, रमाना, बाकल, डीग-चौचड़ा सहित कई ग्रामीण रूटों रात्रि ठहराव के लिए बसें नहीं पहुंची। यात्रियों को शहर में पहुंचने के लिए काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
साक्षात्कार के लिए सोमवार हुआ था तय, भारत बंद के चलते किया रद्द
पूंडरी क्षेत्र के युवा प्रदीप ने बताया कि उन्हें सोमवार को निजी कंपनी में नौकरी के लिए साक्षात्कार के लिए कैथल पहुंचना था। भारत बंद को लेकर उनका साक्षात्कार स्थगित किया गया।
चार बजे के बाद आवश्यकतानुसार चलीं बसें
संस्थान प्रबंधक रोहताश डांगड़ा ने बताया कि भारत बंद के चलते बसों को सुरक्षित डिपो में खड़ा किया गया। जाम खुलने के बाद जरूरत अनुसार बसों को रूटों पर भेजा गया।
बसें बंद होने से डिपो को 15 लाख रुपये आर्थिक नुकसान
डिपो महाप्रबंधक अजय गर्ग ने बताया कि बसें बंद होने से विभाग को काफी नुकसान होता है। रोजाना 20 हजार यात्री बसों में सफर तय करते हैं। सोमवार को बसें बंद होने से लगभग 15 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान अनुमानित किया गया है।
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