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एक पटवारी व सब रजिस्ट्रार नरवाना की लापरवाही से निजी हो गई सरकारी जमीन

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कैथल। बात्ता गांव में 38 साल पहले एक पटवारी और तत्कालीन रजिस्टरी करने वाले सब रजिस्ट्रार नरवाना की लापरवाही से सरकारी जमीन कागजों में निजी हो गई। जबकि यह भूमि इंदिरा आवास योजना के तहत लाभार्थियों को दी गई है और फिलहाल उन्हीं का कब्जा है। लेकिन कागजों में नाम के आधार पर इस जमीन पर न केवल सरकारी मुआवजा और लोन लिया गया, बल्कि जिस व्यक्ति के नाम जमीन की गई थी, उसकी विधवा पत्नी ने इस जमीन को आगे 50 लाख रुपये में बेच दिया। जांच में मामले का खुलासा होने के बाद जमीन बेचने और खरीदने वालों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस कार्रवाई और खरीद-फरोख्त में किए गए इंतकाल को रद्द करने की सिफारिश की है।
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बात्ता गांव निवासी बीरभान ने शिकायत दी थी कि गांव में सरकारी भूमि को मिलीभगत करके निजी लोगों को बेचा गया है, जबकि इस जमीन पर पात्र लोग काबिज हैं। डीसी प्रदीप दहिया ने इस मामले की जांच सीटीएम गुलजार अहमद को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि यह जमीन वर्ष 1984 में इंदिरा आवास योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को अलॉट की गई थी, जिस पर पात्र व्यक्ति काबिज हैं, लेकिन वर्ष 1984 में जमाबंदी में संशोधन न करके तत्कालीन पटवारी मौजा बाता और सब रजिस्ट्रार नरवाना ने लापरवाही बरती। वर्ष 2004 तक यह जमीन सरकार के अधीन थी, लेकिन इसके बाद उक्त दोनों की लापरवाही से जमाबंदी में इस जमीन को गांव बात्ता निवासी फकीरिया के नाम दिखाया गया।
इसके बाद फकीरिया ने इस जमीन पर पंजाब लैंड मॉरगेज बैंक से लोन ले लिया। इसके बाद इस जमीन का कुछ हिस्सा नेशनल हाईवे के लिए अधिग्रहीत किया गया, जिसमें 6 लाख 90 हजार 633 रुपये की मुआवजा राशि फकीरिया की पत्नी रेशमा ने प्राप्त किए। रेशमा ने यह राशि लेकर एनएचएआई के साथ धोखाधड़ी की। फिर रेशमा ने ही यह जमीन 50 लाख रुपये में बात्ता निवासी अनिल, संजू, बलजीत, तेजपाल को बेच दी। दोनों पक्षों ने इस खरीद-फरोख्त को स्वीकार किया है, लेकिन रजिस्टरी में जो चेक दिए गए हैं, उनमें से कुछ चेकों का भुगतान नहीं हुआ है। इससे स्पष्ट है कि खरीद-फरोख्त में फर्जीवाड़ा हुआ है। ऐसे में इस जमीन को खरीदने वाले व बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी कैथल को लिखा जाना उचित होगा। जांच अधिकारी ने खरीद-फरोख्त के लिए हुई रजिस्टरी और दर्ज इंतकाल को भी रद्द करने की सिफारिश की है। वहीं जांच में शामिल होते हुए रेशमा देवी ने 50 लाख रुपये में यह जमीन बेचने की बात स्वीकार की है और शिकायत को झूठा करार देते हुए इसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने की नीयत से की गई शिकायत बताया है।
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डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि इस मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर खरीदने वाले व बेचने वालों के खिलाफ केस दर्ज करवाया जाएगा। इसके बाद खरीद-फरोख्त के कागजात को राजस्व रिकॉर्ड में नियमानुसार ठीक किया जाएगा। साथ ही राजस्व विभाग के जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस मामले में संलिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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