कैथल। न्यायालय के आदेशों के बावजूद निकाय विभाग लावारिस कुत्तों को पकड़ने को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा। नगर परिषद अभी तक कुत्ते पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया है। नतीजा यह कि रोजाना आमजन कुत्तों के हमलों का शिकार बन रहे हैं।
दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के पास देहात क्षेत्रों की पीएचसी पर रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों को कुत्ते के काटने पर तत्काल उपचार के लिए शहर के अस्पतालों की ओर भागना पड़ रहा है, तब तक वे दर्द से तड़पते रहते हैं।
जिले में 22 पीएचसी, चार सीएचसी और छह आरोग्य केंद्र संचालित हैं, जिनके अधीन 277 ग्राम पंचायतें आती हैं। नागरिक अस्पताल कैथल में ही औसतन हर माह करीब 250 केस कुत्तों के काटने के पहुंच रहे हैं, जबकि जिलेभर में यह संख्या करीब एक हजार तक पहुंच जाती है। कुत्ते के काटने पर मरीज को चार चरणों में टीका लगाना अनिवार्य है पहले दिन, तीसरे दिन, सातवें दिन और 28वें दिन।
परेशानी बढ़ी, पर अधिकारी गंभीर नहीं ः नगर परिषद द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार शहर में 4,500 लावारिस कुत्ते हैं, जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार यह संख्या और अधिक है। कुत्तों को पकड़ने के लिए प्रस्तावित टेंडर लंबे समय से लटका हुआ है। अधिकारी न तो टेंडर करवा पा रहे हैं और न ही एजेंसी तय हो पा रही है। इस बीच प्रतिदिन 15–20 लोग नागरिक अस्पताल पहुंचकर रेबीज टीकाकरण करवा रहे हैं।
शहरवासी कुत्तों के आतंक से परेशान हैं, लेकिन नगर परिषद की टेंडर प्रक्रिया कछुआ चाल से आगे बढ़ रही है। बार-बार मुद्दा परिषद की बैठकों में उठने के बावजूद समाधान नहीं निकल पा रहा है। यह स्थिति बताती है कि या तो अधिकारी गंभीर नहीं हैं या फिर एजेंसी मिलना चुनौती बन गया है।
नसबंदी कर संख्या नियंत्रित करेगी एजेंसी ः नगर परिषद के अनुसार टेंडर फाइनल होते ही नियुक्त एजेंसी कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी करवाएगी, ताकि संख्या बढ़ने से रोकी जा सके। इसके साथ ही कुत्तों को दो महत्वपूर्ण इंजेक्शन लगाए जाएंगे, जिससे काटने की स्थिति में नागरिकों को गंभीर संक्रमण से बचाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि लगभग 35 लाख रुपये का टेंडर जल्द ही जारी किया जाएगा। संवाद
माह
मामले
जनवरी
313
फरवरी
268
मार्च
326
अप्रैल
214
मई
199
जून
180
जुलाई
200
अगस्त
201
सितंबर
180
अक्तूबर 205
नवंबर (मंगलवार तक)
180
आरोग्य केंद्रों को छोड़कर सभी पीएचसी-सीएचसी पर रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराई गई है। यदि कहीं कमी पाई जाती है तो इंचार्ज से रिपोर्ट लेकर तुरंत वैक्सीन भेज दी जाएगी। विभाग के पास वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता है। -डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन