कैथल। शहर के चंदाना गेट निवासी 84 साल के बुजुर्ग अध्यापक और साहित्यकार श्याम सुंदर गौड़ लाठी पकड़ने की उम्र में भी हरमोनियम पर उंगलियां चला अपने शिष्यों को संगीत के सुर सिखा रहे हैं। आयु अधिक होने के बावजूद उनमें अभी भी अपने शिष्यों को काबिल बनाने का जज्बा है। उनका यह जज्बा उम्र का पड़ाव अधिक होने के बाद भी एक गुरु के गुणों से भरपूर है।
यही नहीं वे अपनी जवानी के समय लंबे समय तक शहर के कबूतर चौक स्थित शहर के सबसे पुराने हिंदू वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में लगातार 36 साल तक एक संगीत अध्यापक के रूप में कार्यरत रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को संगीत का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद वे 2010 से 2016 तक जाट कॉलेज में संगीत के प्रशिक्षक रहे हैं। श्याम सुंदर गौड़ कहना है कि किसी भी हुनर को निखारने के लिए किसी भी प्रकार से कोई स्वार्थ नहीं होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति स्वार्थ अनुसार कार्य करता है तो वह कभी भी काबिल नहीं बन पाता है।
श्याम सुंदर गौड़ बताते हैं कि वह संगीत के विषय में करीब एक हजार विद्यार्थियों को अपने जीवन में प्रशिक्षण दे चुके हैं। इसके बलबूते उनके कई शिष्य अच्छे पदों पर हैं। इसके बाद इस समय भी वे प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे मामूली फीस प्रशिक्षण देने के लिए लेते हैं। गौड़ ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1972 में प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ से संगीत विशारद की थी। इससे पहले उन्होंने मुंबई के हिंदी विद्यापीठ से साहित्य सुधाकर की थी। संवाद
सैकड़ों कविताएं लिख चुके हैं श्याम सुंदर
84 वर्षीय श्याम सुंदर ने बताया कि वे एक अध्यापक होने के साथ ही एक साहित्यकार भी हैं। वे सैकड़ों कविताएं भी लिख चुके हैं और कई साहित्य से जुड़ी रचनाएं भी लिखी है। गौड़ ने बताया कि उन्होंने 1984 से लेकर 1993 तक आकाशवाणी पर गीत प्रस्तुत किए हैं। इसके बाद वे 2000 के बाद से भी वे लगातार आकाशवाणी पर गीत प्रस्तुत करते हैं। गौड़ ने कहा कि उनका प्रयास है प्रशिक्षण लेने के बाद हमेशा उनका शिष्य बुलंदियों को छुए।